"कहां रह गई मरजानिये? निम्मो जल्दी घर आ जा, तेरे बाबूजी के आने का समय हो गया!" निम्मो की माँ भगवंती, इतनी तेज आवाज में चिल्ला रही थी कि दो घर दूर बैठी निम्मो, माँ की आवाज सुनकर सावधान मुद्रा में खड़ी हो गई!
"अरे बाप रे, इतना समय हो गया??" निम्मो ने तेजी से कदम अपने घर की ओर बढ़ाए!
दरअसल निम्मो आज पड़ोस में रहने वाली सहेली सारिका के घर 'दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे' मूवी देखने आई थी! चूंकि, निम्मो के बाबूजी आज काम से दूसरे शहर गए हुए थे तो भगवंती ने निम्मो को जाने दिया। भगवंती को भी पता था उनकी बेटी को शाहरुख खान कितना पसंद है!
"क्या माँ, इतनी जल्दी क्यों आवाज़ लगा ली? अभी तो अमरीश पुरी काजोल को बोलने वाला था, "जा सिमरन जा, जी ले अपनी जिंदगी!"
निम्मो ने इतने फिल्मी अंदाज में डायलॉग बोला कि माँ भी हंसे बिना न रह पाई|  
"चुप कर, तेरे बाबूजी ने देख लिया ना तो मेरी हालत ख़राब कर देंगे! तू जानती नहीं है क्या उन्हें?"
"माँ, बाबूजी ही तो हैं! कौन सा कोई बम हैं? जो फट जाएंगे!"
"बम से कम भी नहीं है तेरे बाबूजी!"
हा हा हा ..... दोनों फिर खिलखिला कर हँस दी!
वैसे तो निम्मो 21वीं सदी की लड़की थी, पर उसके बाबूजी ने घर का माहौल 18वीं सदी या उससे पहले का बना रखा था! जहां आजकल के बच्चे पर्सनल फोन और नए गैजेट्स के बिना नहीं रहते, वहीं निम्मो के घर पर मनोरंजन के साधन के रूप में मात्र एक रेडियो था| वो भी बस बाबूजी के घर आने पर ही बजता था। बहुत ही प्यारी और खुशमिजाज लड़की थी निम्मो! उसको रूप और रंग देने में ईश्वर ने कोई भी कोताही नहीं बरती थी। पढ़ाई में भी अव्वल दर्जे में पास होती आई थी, जिस कारण स्कूल की प्राचार्य के अनुरोध पर बाबूजी ने उसे 12वी तक पढ़ने की अनुमति दे दी ! उनके परिवार में लड़कियों के दसवीं पास करते ही हाथ पीले कर दिए जाते थे|

एक ओर बाबूजी, निम्मो के 12वीं के पेपर खत्म होने का इंतजार कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर निम्मो की ताया जी की लड़की शादी के 1 साल के अंदर ही घर वापस आ गई! उसका पति उसको शराब पीकर प्रताड़ित करता था! विरोध करने पर उसको मायके छोड़ गया, निम्मो के बाबू जी को लगता कि गलती लड़की की है| थोड़ा हाथ उठा लिया तो सह लेती, पति ही तो है, मार दिया तो क्या?
व्यग्र निम्मो को अपनी बाबूजी की ये बात पचाना बर्दाश्त से बाहर था। पर माँ के कहने पर वह चुप रही। इसी बीच निम्मो के 12वीं की परीक्षाओं का रिजल्ट भी आ गया। निम्मो ने बड़े अच्छे अंको से 12वीं पास की! वह खुशी-खुशी बाबू जी के पास रिजल्ट लेकर गई। बाबू जी ने एक सरसरी नजर रिजल्ट पर डाली और भगवंती से बोले , “2 साल बेकार हो गए इसकी पढ़ाई के चक्कर में, अब इसके लिए लड़का देखना शुरू करता हूं!"
बाबूजी के इस बर्ताव से निम्मो बहुत दुखी हुई। एक दिन निम्मो के बाबूजी दिन में ही घर आ गए, आते ही अपनी पत्नी से बोले, “निम्मो के लिए लड़का देख कर आया हूं, अच्छा लड़का है! सरकारी नौकरी करता है, माँ बाप भी सीधे-साधे हैं| मैं अपनी तरफ से हाँ कर आया। वो लोग अगले सोमवार को देखने आ रहे हैं निम्मो को! सब तैयारी कर लेना और अब इसको घर पर ही रखो!"
निम्मो और भगवंती ये सब सुनकर असमंजस में पड़ गए|
"आप लड़का भी देख आये और बताया भी नहीं?" भगवंती ने धीमे स्वर में कहा।
"मैंने बताना जरूरी नहीं समझा" बाबूजी ने तल्ख लहजे में जवाब दिया।

निम्मो, माँ बाबूजी की बातचीत बीच में छोड़कर अपने कमरे में चली गई!
भगवंती जब निम्मो के कमरे में गई तो वो बहुत उदास बैठी थी| माँ के आते ही बोली, "मुझे नहीं करनी कोई शादी-वादी"!
"शादी नहीं करेगी तो सपनों का SRK (शाहरूख खान) कैसे मिलेगा? वैसे तो पूछती रहती है माँ, मेरा सपनों का राजकुमार कब मिलेगा? और अब जब राजकुमार मिल रहा है तो तू मना कर रही है!"
भगवंती ने निम्मो की मायूसी दूर करने की कोशिश की!
"माँ, यह सब सिनेमा में होता है, असल जिंदगी में नहीं। सिनेमा में मिलते हैं सपनों के SRK| असल जिंदगी में अमरीश पुरी मिलते हैं जैसे बाबूजी, ताया जी और तायाजी के दामाद! जो अपनी बीवियों को कठपुतली बनाकर अपनी उंगलियों पर नचाना जानते हैं!"
अरे ना मेरी लाडो, तू तो किस्मत की धनी है! तुझे तेरेे सपनों का राजकुमार जरूर मिलेगा! इसके लिए शादी करनी होगी और शादी तो सबको करनी होती है ना बेटा! चल हँस के दिखा?
निम्मो ने माँ को गले लगा लिया!
पर अपने घर में महिलाओं की स्थिति देखकर उसके मन मे पतियों के लिए खौफ तो था और वह सभी चिंताएं थी जो एक लड़की के मन में अपने भविष्य को लेकर होती हैं! पर माँ के कहने पर वह शादी के लिए मान गई!
आखिरकार निम्मो का रिश्ता विनीत के साथ तय हो गया! साधारण रंग रूप का पर दिखने मे सज्जन था विनीत। दोनों की चट मंगनी पट ब्याह हो गया| शादी की पहली रात निम्मो ने एक नज़र विनीत को देखा और फिर अपनी आंखें नीची कर ली! पर विनीत निम्मो से अपनी नजर हटा ही नहीं पा रहा था, इतनी सुंदर जो लग रही थी!

परिवार की एक औरत दो दूध की गिलास कमरे में रख कर चली गई! कमरे में पसरी चुप्पी को तोड़ते हुए विनीत ने निम्मो को दूध पीने के लिए कहा और उसके हाथ को छूने लगा! पहली बार किसी मर्द के स्पर्श से निम्मो के तन बदन में कपकपी छूट गई। उसके हाथ से दूध का गिलास नीचे गिर गया!
वो रोते हुए बोली, “आप गुस्सा मत होना, मुझसे गलती से गिर गया!
"अरे इतनी सी बात पर कौन गुस्सा होता है?" विनीत बोला!
"आप पति हो ना मेरे, किसी भी बात पर मुझ पर गुस्सा कर सकते हो" उसने मासूम सी शक्ल बनाते हुए कहा!
विनीत को एक मिनट भी नहीं लगा निम्मो की मनोस्थिति जानने में! वो पहले से निम्मो के परिवार का लेखा जोखा जानता था! विनीत समझ चुका था निम्मो पर पत्नी का हक जमाने से पहले उसे सहज महसूस करवाना होगा और उसके मन में आदमी को लेकर जो गलत भावनाएं हैं, संदेह हैं उसको दूर करना होगा!
निम्मो की बाहरी दुनिया स्कूल के रास्ते से घर के रास्ते तक ही सिमटी थी! इससे बाहर की दुनिया से वो बिल्कुल बेख़बर सी थी। शादी के कुछ दिन बाद विनीत ने निम्मो से पूछा, "मूवी चलोगी? तुम्हारे फेवरेट हीरो शाहरुख खान की है"!
"आपको कैसे पता कि मेरा पसंदीदा हीरो शाहरुख खान है?"
"वो तुम्हारी सहेली है ना, सारिका जिसके घर तुम चोरी छिपे सिनेमा देखने जाती थी, उसने ही बताया शादी में!"
निम्मो झेप गई और विनीत हँस पड़ा!
"चलो तुम रेडी हो जाओ!"
आज पहली बार निम्मो ने बड़े पर्दे पर सिनेमा देखा| वो बहुत खुश हुई!
एक दिन वो सोचने लगी, शादी को एक महीना हो गया विनीत जी ने एक बार भी मुझ पर गुस्सा नहीं किया! कभी जबरदस्ती भी नहीं की, क्या वो सच में बाकी पतियों से अलग हैं? दिल ही दिल में उसे विनीत में अपने सपनों का SRk नजर आने लगा था|

रविवार का दिन था, निम्मो के सास ससुर घर पर नहीं थे। घर में बस निम्मो और विनीत थे! आसमान पर अचानक काले घने बादलों ने कब्जा कर लिया| अचानक आई बारिश ने माहौल को और रोमाँटिक बना दिया!
"चलो आओ, बारिश में भीगते हैं" विनीत बोला!
"नहीं नहीं... कोई देख लेगा" निम्मो सकुचाई। 
"कोई नहीं है यार यहां, तुम्हें बारिश पसंद नहीं क्या?"
"बहुत पसंद है" निम्मो ने आंखें बड़ी करते हुए कहा!
"तो देर किस बात की, चलो बारिश का मजा लेते हैं"!
आज पहली बार निम्मो ने खुलकर बारिश का मजा लिया! वह इतनी खुश हुई उसने उत्सुकता मे विनीत को गले लगा लिया! विनीत भी इस खुशगवार मौसम में इतने अच्छे पलों को गंवाना नहीं चाहता था| उसने निम्मो को अपनी बाहों में पकड़कर तेजी से जकड़ लिया! विनीत के छूते ही निम्मो के मरूस्थल शरीर में हरियाली खिल गई। आज उनका शादीशुदा जीवन नए आयाम पर पहुंच गया। 
विनीत सरकारी नौकरी में ओर ऊंचे पद पाने के लिए कोई ना कोई परीक्षा देता रहता! एक दिन उसने देखा, निम्मो उसकी किताबों को बड़ी चाव से पढ रही थी। विनीत के आते ही उसने झट से किताबे बंद कर दी! पर विनीत उसकी पढ़ने की ललक को समझ गया|
"तुम आगे पढ़ना चाहती हो?"
निम्मो आश्चर्य से विनीत की तरफ देखने लगी!
अब विनीत निम्मो की आंखों से उसके दिल का हाल जान जाता था!
"पर यह मुमकिन नहीं"
"सब मुमकिन है अगर तुम चाहो!"
"शादी के बाद बहू को कौन पढ़ने देता है, पापा जी नहीं मानेंगे?"
"थोड़ा मुश्किल है, पर हम कोशिश तो कर सकते हैं! उनसे बात करके देखता हूं"
विनीत के आश्वासन ने उसके मन मे आशा की एक लौ चला दी। थोड़ी ना नुकुर करने के बाद सास-ससुर भी मान गए कि उनकी बहू को स्नातक तक पढ़ाई कर लेनी चाहिए! विनीत ने निम्मो का बीए में एडमिशन करवा दिया!

आज उसका फाइनल रिजल्ट आना था। सुबह से उसका किसी काम में मन नहीं लगा। पेपर में फेल होने से ज्यादा डर उसे इस बात का था कि कहीं वो विनीत की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी तो!
"तुम्हारा रिजल्ट आ गया" विनीत ने कहा!
"तुम.."
"मैं क्या?"
"फेल हो गई ना, मुझे पता था" उसने भारी मन से कहा!
"फर्स्ट क्लास से पास हुई हो तुम पगली!"
निम्मो की आंखों में खुशी के आंसू झलक पड़े! ये वो सपना था जो निम्मो नेे देखा तो था, पर किसी से कहने की हिम्मत नहीं की थी| सपने को सच विनीत ने करवाया! निम्मो के ग्रेजुएशन में फर्स्ट आने की खुशी में घर में एक गेट टुगेदर रखा गया! जिसमें निम्मो के मायके वालों को भी आमंत्रित किया गया! शाम को जब सब लोग खाने पर एकत्रित हुए, तो निम्मो ने गुलाब के फूलों का गुलदस्ता विनीत को दिया! सबकी नजरें उन दोनों पर थी, पास तो निम्मो हुई है फिर गुलदस्ता विनीत को क्यों? उसने गुलदस्ता विनीत की तरफ बढ़ाते हुए उसकी आंखों में आंखें डालते हुए कहा, "शादी के इन 4 सालों में तुमने जो मुझे प्यार और सम्मान दिया है, मैंने उसकी कभी कल्पना भी नहीं की थी! तुम मेरी अंधेरी जिंदगी में वो दिया बनके आए हो, जिसने मेरे जीवन को रोशनी से जगमग दिया है! मुझे लगता था, पति पत्नियों को वह खिलौना समझते हैं जिनकी चाबी पति लोग भरते हैं! जितनी चाबी भरी जाएगी बस उतना ही खिलौना चलेगा! पर तुमने बताया कि पति के जीवन में पत्नियों का क्या स्थान होता है।"
निम्मो ने अपनी माँ की तरफ देख कर कहा, "माँ तुम सच कहती थी मुझे मेरे सपनों का राजकुमार मिलेगा! हां, सच में मुझे मिल गया! मेरे सपनों के राजकुमार, मेरे विनीत जी! आई लव यू पतिदेव..।"

"अब चुप करो रुलाओगीे क्या??"
"ऐसे बड़े बड़े शहरों में ऐसी छोटी-छोटी बातें होती रहती है सेनोरिटा"
"आई लव यू टू मेरी पगली"
और वहां मौजूद सब लोगों ने तालियां बजाना शुरू कर दी! कहीं मत जाइए दोस्तों, ये सिर्फ एक कहानी ही नहीं है| कभी कभी असल जिंदगी में भी सच्चा प्यार शादी के बाद मिलता है।



                 प्राची गोयल गुप्ता