जीवन एक संघर्ष है तो ये मनुज की एक कर्मस्थली।
मिलता है अभीष्ट सबको प्रधानता होती निज कर्म की।
फ़तह कर लेते एवरेस्ट जिनमें है अदम्य साहस,उत्साह।
जिनसे न कुछ बन पड़ा वे अलापते हैं दैव- दैव राग।
अतिरूग्ण को भी बुला लेती अपनी ओर जीवन उषा।
क्योंकि उनमें निहित है अपार अतुलनीय जिजीविषा।
कुछ लोग परेशान हो नाकामियों से देते जीवन को लुटा।
उनका तो क्या परिवार पर अनगिनत दुखों का पर्वत टूटा।
माना जीवन का सफ़र मुश्किल है पर खुले रास्ते भी हैं।
मनचाही मंजिल चुनने के कुछ विकल्प भी प्रस्तुत हैं।
जीवन.का फलस़फ़ा भी कितना कुछ अज़ीबो गरीब़ है।
गली गली डगर डगर जीवन की कुछ न कुछ सीख है।
कभी कभी अत्यधिक प्रयत्नशील भी असफल हो जाते।
कुछ किस्मत के धनी सहज , सफलता के पऱचम लहराते।
जीवन सुख और दुःख का एक अद्भुत तालमेल है।
दुख के बाद प्राप्त सुख का अनुभव अवर्णनीय है।
मिलनऔर वियोग ये दो जीवन के संयोग व दुर्योग हैं।
विरह के बाद होता मिलन जीवन लगता अमृततुल्य है
देखें न विषमता जीवन की समरसता का सृजन करें।
किसी का मस्तक ऊंचा देख स्वयं में हीनभाव न भरें।
जीवन है तो परिवर्तन का नियम भी एक सत्य है।
जन्मा है जो धरा पर ,मरेगा एक दिन यह कटु सत्य है।
ज्ञान क्षेत्र भी जीवन का बहुत व्यापक और विशाल है।
इसे पाने की अति लालसा में मूर्ख बन जाता कालिदास है।
कर्म यज्ञ महान यज्ञ ,यह जीवन का अद्भुत स्रोत है।
विपिन में तम है यदि ,तो आशा की एक रश्मि भी है।
स्नेह लता पाण्डेय
नई दिल्ली

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