कभी दुर्गा तो कभी काली हूँ
हाँ मैं स्त्री हूँ
कभी कमजोर तो कभी साहसी हूँ
हाँ मैं स्त्री हूँ
मैं वही स्त्री हूँ जो कुछ घर मे पूजी जाती हूँ
तो कुछ घरों में अपमानित की जाती हूँ
हाँ मैं स्त्री हूँ
मैं वही स्त्री हूँ जो कुल का मान बढ़ाती हूँ
और समय आने पर अपनी आबरू बचाने के लिए
नरसंहार पर उतर जाती हूँ
हाँ मैं स्त्री हूँ
कोमल हृदय , कोमल शरीर, ओर फौलादी हौसले लिए
परमेश्वर की अद्भुत रचना हूँ
हाँ मैं स्त्री हूँ
जब बात मेरे परिवार कि आ जाये
तो निर्भयता से सबको खदेड़ने वाली हूँ
हाँ मैं स्त्री हूँ
सहनशीलता की मूरत हूँ
हाँ मैं स्त्री हूँ
जिंदगी में सभी से तिरस्कृत भी की जाती हूँ
परिवार की खुशहाली के लिए अपमान का घूट भी पी जाती हूँ
हाँ मैं स्त्री हूँ
मैं वही स्त्री हूँ जो अपनी काबिलियत के दम पर समानता का अधिकार पाती हूँ
हाँ मैं स्त्री हूँ
अब किसी क्षेत्र में नहीं हूँ पीछे
हर क्षेत्र में अपने विजय का परचम लहराती हूँ
हाँ मैं स्त्री हूँ
कभी दुर्गा तो कभी काली हूँ
हाँ मैं स्त्री हूँ
काजल हर्ष

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