खामोश नजरों से हाले दिल कह गया,
बिछड़ते बिछड़ते मिलने की बजह दे गया,
आखिरी वक्त है यों न कह अलबिदा,
तुझे मेरी कसम एकबार मुस्कुरा,
यह कहकर रूठते दिल को  सुलह दे गया,

गर रही जिन्दगी तो मिलेंगे फिर कभी,
इतनी जल्दी नउम्मीद होना अभी,
यह कहकर उम्रभर इंतजार की  बजह दे गया।

जिसमें बंधी है मखमली यादों की पोटली,
 दिल के  जज्बों में है छुपी
जो कभी न गिरेगी ऐसी गिरह दे गया।

कभी हंसती हूँ उसकी बात पर तन्हां,
कभी रोने लगती हूँ महफिलों में
समझ आता नही वो खुशी दे गया या बिरह दे गया


                         अंजू दीक्षित
                       बदायूँ ,उत्तर प्रदेश