आईना तूँ भी 
बड़ा बेवफा है...!
जो आ जाएं तेरे सामने 
तूँ उसी का हो जाता है...!!

ऐ कैसा तूने राज 
छूपा रखा है...!
देखकर तेरी ओर हर 
शख्स तुझमें खो जाता है...!!

तूँ भी तो एक 
तरफ से काला है...!
फिर क्यों तूने सच, झूठ 
का मोह इंसान में डाला है...!!

आईना तूने ही तो 
इश्क को भी सँवारा है...!
फिर क्यों हर दिल 
आवारा है...!!

आँखों के आँसू भी 
तो तूँ पढ़ लेता है...!
सब कुछ जानकर भी 
तो खामोश तूँ रहता है...!!

दिल और तूँ एक 
समान ही तो होता होगा...!
चूर चूर हो जाने पर 
तूँ भी तो चुपचुप के रोता होगा...!!




      आरती सुधाकर सिरसाट
       बुरहानपुर मध्यप्रदेश