मेरी बेटी मुझे बडी प्यारी है
बह मुझे माँ दोस्त एक सच्ची टीचर जो मानती है।
नाराज भी होती है प्यार भी दिखाती है रूठ भी जाती है इतरा भी जाती है
कभी तितली की तरह रंग बिरंगी खुशियाँ मेरे जीवन मे भर देती है।
सारी अनुभूतियाँ मुझे अपनी बेटी से मिलती है
अपने पन की,उम्मीदो की, संपूर्णता की,सब बेटी ही तो भर देती है ।
बिटिया तो बिटिया है सुखो की पुड़िया है
माँ की दुनिया है।
ममता की बगिया है।
ये मेरी रानी गुडिया,
मेरी लाडो
मेरी चुन्मुनीया है खिलखिला कर हँस देती बह सयानी सी गुडिया ह
मेरी मुनिया है मेरी बह प्यारी सी दुनिया है
मेरी बिटिया है
मेरी बिटिया है ।
मेरी बिटिया है।
डां सुरभि जैंन "श्रुति"

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