जरा सुनिए न ,मुझे आपसे बहुत सी बातें करना है,
देखो हमारी शादी के, सोलह सावन बीत गए
और सबका मन रखते रखते, हम आप जैसे खो ही गये
ठहरो न आपके संग हमें लम्हे चंद गुजारना है।
जरा सुनिए न ,मुझे आपसे बहुत सी बातें करना है।
ग़र आपके पास बहुत हैं काम ,तो फुरसत में मैं भी हूं नहीं
जो आज समय ये निकल गया फिर पल ये कभी पाओगे नही
बैठो न जरा मुझे आपके कंधे पर सिर रखना है।
जरा सुनिए न मुझे आपसे बहुत सी बातें करना है।
प्रिय आप तो ठहरे बैरागी ,पर अनुरागी मेरा मन है
इक बार प्यार से तो देखो, यह मेरा प्रणय निवेदन है
आँखों में आपकी देखकर मुझको आज संवरना है।
जरा सुनिए न, मुझे आपसे बहुत सी बातें करना है।
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–प्रीति ताम्रकार
जबलपुर

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