मेरे मासूम द़िल ने तुझपे एतब़ार किया था।
जान से भी बढ़कर..... तुझसे प्यार किया था।
मेरा हर दिन हर रात.... तुझपे कुर्बान किया था।
हर सफर पर तेरा...... दीवानगी से साथ दिया था।
सारे जहां तक को मैंने तेरे लिए भुला दिया था।
क्योंकि ! तेरी बातों पर....... मेरा दिल आ गया था।
तेरी फितरत ....कुछ खटकती तो थी मुझे।
लेकिन उसे भी मैंने.... नजरअंदाज किया था।
आरजू थी ....अंतिम
सांस तक तेरे दीदार की ,
पर बीच रस्तेे मेंं.... दामन झटक दिया था।
अब सोचती हूं सारी खता मेरी ही थी।
क्योंकि तेरी बातों पर.... मेरा द़िल आ गया था।
स्नेहलता पाण्डेय
नई दिल्ली

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