ज़िंदगी का सफ़र तय कौंन करता हैं
मंजिल तक का सफ़र कौंन करता हैं
देखने का नज़रिया हैं यारों
असल में सफ़र कौंन करता हैं
हर कोई कमजोर नब्ज़ ही टटोलता हैं
ऐसा विरला अब यहाँ कौंन मिलता हैं
ज़रा सम्भल कर चलना यारों
यहाँ किसी की फ़िकर कौंन करता हैं
दिल का दर्द उसी से कहना जो समझ लें
वरना किसी के दर्द पर नज़र कौंन करता हैं
तुम भी तन्हां हम भी तन्हां ,
सुनो यारो तन्हां सफ़र कौंन करता हैं
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✍️✍️ अनुराग सिंह

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