यूँ ही नहीं शब्द दिल 
को छू जाते हैं,
खुद के दर्द दिल में 
ही सिल जाते हैं...

यूँ ही नहीं कलम के 
आँसू निकल आते हैं..!
लिखने वाले का दर्द
कह जाते हैं..!!

यूँ ही नहीं कोई निखर
पाते है..!! 
उसके लिए न जाने कितने 
ही सपने बिखर जाते हैं..!!

यूँ ही नहीं कोई भी 
लेखक बन पाते हैं..!
उसके लिए हजारों
दर्द सहे जाते है..!!

    आरती सुधाकर सिरसाट
    बुरहानपुर मध्यप्रदेश