अपना मकान बदल कर, दिखाया जाये"""
शानो शौकत से ,जिन्दगी गुजारने वालो""""
चलो एक रात, फुटपाथ पर बिताया जाये """""""
गरीबी मे कुछ दिन ,जी कर देखो """"""
सूखी रोटी पर नमक ,लगाकर देखो""""
लज्जत आ जायेगी ,गहरी भूख मे"""""
चलो मेहनत का, निवाला खाया जाये""""
चिपकती आँते, बेरहम भूख ,नंगे तन देखो""""
उसके बाद, अमीरी के कुछ रंग देखो """""""
नाचती है, आग पेट की बुझाने के लिऐ"""""
चलो उनके लिऐ कुछ, बन्दोबस्त किया जाये"""
देखते है तन, नजरे चुभती है ,देखो""
जर्जर है जिस्म ,बुझा है मन देखो"""
उन्हे अब बख्श दो, जीने के लिऐ"""
चलो उनके लिऐ ,कुछ कदम उठाया जाये"""
रीमा ठाकुर (लेखिका)

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