आज सुबह जैसे ही फ़ोन उठाया तो बड़े भाई का एक संदेश आया जो पंजाबी मे था कि पैके मावां नाल नीं परावा नाल वी ने(अर्थ मायका माँ के साथ ही नही भाइ!यों के साथ भी होता है) छोटे भाई और माँ के एक साथ देहांत होने के कारण मायका जाना कम हो गया था।इस को पड़ कर सोचा चलो घर जाते है इसी बहाने पिता जी से भी मुलाकात हो जाएगी।जल्दी जल्दी छोटी बहन को भी फ़ोन किया ,घर के लिये थोड़ा समान लिया और अपना थोड़ा समान लै कर चल दी घर की तरफ।जैसे ही माँ के घर पँहुचे तो क्या देखते है कि जिस घर में माँ ने कभी मिट्टी को घर के अंदर आने नही दिया था,आज पूरे घर में आज मिट्टी का साम्रज्य फैला था।अपने ही घर में मेहमानो की तरह बैठे थे।जहां पर माँ घर जाते ही कितने काम बोल देती थी आज वहां चाय भी भाई ने ही बनाई थी।चाय पी कर सोचा क्यों न साथ वाले कमरे में बैठे पिता जी से मिल लै ,क्योंकि वो भी तो माँ के जाने के बाद अकेले हो गए है ।पर ये क्या जैसे ही हम दोनों बहनें पिता जी को प्रणाम किया,उन्होंने बिना कुछ सोचे सीधा एक ही वाक्या बोला कि अब तुम दोनों बहनें आ ही गाई हो तो घर के ज़रूरी कागजो पर हस्ताक्षर कर दो ।ये शब्द पिता जी ने बोले पर सोच उनकी ना थी। ये सुन कर हम दोनों बहनों ने नमी वाली आँखों से माँ की तस्वीर की तरफ देखा और दिल किया कि पिता जी को बोल दे की हम आप को मिलने आये है ।मायके की कमी को महसूस करते हुऐ नमी वाली आँखों से अपने -अपने घर की और चल दी ।घर की तरफ जाते हूऐ पंजाबी गायक सुरजीत बिंदरखिया का गाना याद आ गया ..! कब्रा विचो बोल नी माए,
दुख सुख धी नाल बोल नी माए,
आवा ता मै आवा नी माए,
आवा केडे चावा नाल,
मां में मुड़ नहियो पेके ओना,
पेके हूंदे मावा नाल................पेके हूंदे मावा नाल।
मधू रतन

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