मिल कर बिछड़ने  की बात ना करो ,
चाहे कुछ दिन मुलाकात ना करो।
यूं तो दिल तोड़ना है गुनाह यह गुनाह करे जमाना ,
आपसे गुजारिश है आप ना करो ।
अभी तो जागे हैं ख्वाब तुमसे मिलकर इन आंखों के ,
नाम इन आँखों के अश्कों की बरसात ना करो ।
दिल को रहने दो दिल से जुड़ा  एक अनछुआ वास्ता,
चाहे साथ कोई महफिले हयात न करो।
  अपने गमों का साझी बना लो मुझको ,
चाहे खुशियों में मुझे साथ ना करो।
बस चंद पल वख्स दो मुझे अकीदत के,
मेरे नाम उम्र भर के मिलन की जायदाद ना करो।
जब भी मिलो राहों में मुस्कुरा दिया करो,
चाहे गले लग कर इस्तकबाल ना करो ।
जमाने से ये उम्मीद वो रुला देगा मुझे ,
पर टुकड़े-टुकड़े तुम मेरे जज्बात ना करो ।
कभी कभी आ जाया करो उनीदी पलकों में,
चाहें मेरे नाम सारी रात न करो।
  साल 6 महीने में हाल सुनो मेरा होके मुखतलब ,
चाहें रोज रोज मुझको याद न करो।
बिछड़ने की बात ना करो

अंजू दीक्षित 
बदायूँ (उत्तर प्रदेश)