खोई खोई सी
रहती हर पल
नई दुल्हन
गोरे हाथों में
मेहँदी की खुशबू
बनी बैरन
फूलो की सेज
और संग पिया का
रहा दो पल
देस सेवा को
जबसे गये सैया
नैना सजल
आँखे हैं रोती
पर चुप रहती
दूरी सहती
फर्ज जरूरी
समझके छुपाती
बातें जिया की
कैसे कहे वो
पल पल सताए
यादें पिया की
–प्रीति ताम्रकार
जबलपुर

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