आज फिर उदास बैठी थी "कर्णिका, कोई रास्ता न बचा धा। 
भाग निकलने का, राजा साहब बन्दी बना लिए गये थे "गौरवमय इतिहास धूल धूसरित हो चुका था। 
पर अब नारी सम्मान की बात थी। राजकुमारी कर्णिका पीछे 
हटने वालो मे से न थी। 
वो साहस के साथ उठ खडी हुई "और दुर्ग मे उपस्थित सभी नारियो को सम्बोधित करते हुऐ बोली "
आप सब हमारे लिए आदरणीय "हैं आप हमारा सम्मान हैं।  आज बात हमारे गौरव और आन बान की है। 
हमारे पास दो विकल्प है। लडते हुऐ मरना  या प्राणो की आहुति "समय बहुत कम है। निर्णय अभी लेना होगा। 
सारे दुर्ग मे सन्नाटा छा गया। कोई कुछ न बोला "
तभी एक आवाज़ गूँजी "वो एक दासी पुत्री थी। हम शुरूआत करते है।  हम से ज्यादा आज कोई भी नारी मजबूर नहीं होगी "मै कुछ ही दिनो मे बच्चे को जननी बनने वाली हूँ। मेरे बच्चे से ज्यादा मुझे नारी सम्मान प्रिये है। 
और पलक झपकते ही उस वीरांगना ने कटार अपने पेट मे घोप ली "और मिट्टी को चूमते हुऐ प्राण त्याग दिया। 
राजकुमारी कर्णिका सिहर गई "इतना त्याग बलिदान जिस मिट्टी मे हो "वहा की नरिया अबला कैसे हो सकती है। 
वो सबला है। और रणचंडी के जय घोष के साथ उठ खडी हुई "कुछ पल मे ही नाई ने उनके केश काट दिये "और वो एक सैनिक के रुप में युध्द स्थल पर नेतृत्व के लिए पहुँच गई " और उनकी वीरता देखते दुश्मन कुछ नर्म पडा "और और उनसे समझोते की गुजरिश की "कर्णिका समझोते के लिए तैयार थी। वो जब खेमे की तरफ बढी तो  "बाकी लोगों को अपने साथ आने के लिए न कर दिया। और अकेले ही निडरता से आगे बढ चली "उनके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी। 
उन्हें देखते ही दुश्मन उठ खडा हुआ "और समझोते की पहली शर्त महाराज की आजादी  "महाराज को आजाद कर दिया गया। शाम के जश्न मे शरीक होने के साथ उठ कर खडी हो गई राजकुमारी कर्णिका "खेमे के बाहर निकलते ही अचानक से मुडी कर्णिका "पास ही खडे सिपाहसलार से तलवार छीनकर बिना पलक झपकऐ ,कितनो ही वार कर 
दिये दुश्मन पर "सबकी साँसे रुक गई "दुश्मन ढेर हो चुका था। अचानक से कर्णिका के जिस्म मे कितनी ही तलवारे एक साथ धसती चली गई "जय भवानी के जयघोष के साथ  वो वीरागँना वीरगति को प्राप्त हो गई """""""
वीरांगना  को शत शत नमन 🙏🏼🙏🏼🙏🏼🌹🌹🌹समाप्त 



         रीमा महेन्द्र ठाकुर 🙏🏼✍️🏻
रानापुर -झाबुआ -मध्यप्रदेश