गुजर रहे बेगाने से 
हमारे अश्क वजह जो 
उन्ही पे दिलनिसार हैं 
बेशक यह फिजाये फितरत पर उतारू हैं 

गुजर रहे बेगाने से 
हमारे दिल के हिस्सा जो 
कर चले हमे विदा यु ही 
मानो राह कि मीट्टी हो

गुजर रहे बेगाने से 
वो आज भी हमारे हैं 
माना के एहसास भी 
ऊनको ना गवारा हैं 

गुजर रहे बेगाने से 
छायी हैं बेरूखी भी
तपती धूप का बहाना है 
मनाना तुम्ही को क्यों इतना जरूरी है 

सब जानते हैं वो भी 
हैं नजरे इनायत युही 
गुजर रहे बेगाने से जो 
है जान बनके  धडकन साँस की..

बेशक तु चला जा 
बनके दिल मुझमे
युही समाये जा रहा हैं फिरभी 
बेगाने से क्या करे बयाँ हम ही ..



सारिका ऐवले