जनवरी 2021 को बहुत खास दिन था। नया साल बधाइयां व्हाट्सएप पर फेसबुक पर सारा दिन चली ।
इस बार  अंतर था पहले की अपेक्षा ज्यादा फोन पर ना मैंने किसी को बधाई दी और ना मेरे ज्यादा कोई आया।मेरी बेस्ट फ्रेंड का फोन आया अभी तो मैंने उसको भी समझाया कि क्यों आजकल के मैसेज नहीं देख रही कि हमें नया साल नहीं मनाना होगा, यह कोई हमारा है हमारा तो चैत्र में आता है। पर दोनों का ही मत था कि चलो इस बहाने हमने एक दूसरे के लिए समय निकाला।
हां मेरा छोटा बेटा मुझे समय समय पर याद दिलाता रहा पूरा न्यू ईयर पार्टी का क्या बाहर डिनर के लिए नहीं चलोगे ?
मैंने सुबह-सुबह उनकी पसंद के ब्रेड पकोड़े उसे खिलाएं।
तो रात को हम डिनर के लिए गए बस यही हमारा नया साल था।

कुछ साल पहले तक नया साल बहुत धूमधाम से मनाया जाता था । मेरी सोच काफी बदल गई है, जो मैंने महसूस किया है इन सालों में वह मैं अपनी डायरी में लिख रही हूं नए साल को लेकर।
जब से मुझे याद है बचपन में हर साल सुबह - सुबह हम जल्दी उठते थे और नए साल को लेकर बहुत चाव मन में होता था कि हम अगर नए साल को सुबह जल्दी उठेंगे, नहाएंगे अच्छे-अच्छे काम करेंगे, अच्छी आदतें अपनाएंगे तो पूरा साले सही रहेगा।

हमारे घर भी आस पड़ोस में भी सबके  घर इस दिन हलवा बनता था। सब नए साल को जल्दी नहा धो के गरम-गरम हलवा खाते। सुबह एक दूसरे को देख कर सब नए साल की राम-राम बोला करते थे।

 मैं बड़ी हुई तो देखा नए साल को तो 1 दिन पहले ही मना लेते हैं 31 तारीख को रात को लोग  पार्टी करते हैं, टीवी पर बहुत सारे इसी तरह की प्रोग्राम आते थे। फिर हम रात को टीवी के प्रोग्राम चलाकर गानों के साथ झूमते थे, नए साल की पार्टी मांगते थे।

स्कूल में, ट्यूशन सेंटर्स ,पर कंप्यूटर सेंटर पर सारी खरीदारी करके सजा धजा करने साल की पार्टी  होने लगी थी।

धीरे-धीरे नया साल और उसके पार्टी का क्रेज इतना बढ़ गया था कि लोग 31 तारीख को शराब पीना और नशा करना जरूरी समझने लगे।नए साल को पूरी रात जागना ही नया साल मनाना हो गया। वह बचपन की आदत है कि नई साल को तो जल्दी उठना है, अच्छे काम करने को कहीं पीछे छूट गई थी।

 शादी हुई बच्चे हुए हम थोड़े समझदार हुए हैं। नए साल को लेकर पार्टी मनाने का चाव अब दूसरी तरफ मुड़ गया था कि चलो इस बहाने भूले बिसरे रिश्ते याद आ जाते हैं जिन दोस्तों से पूरा साल बात नहीं होती बात हो जाती हैं। अब नए साल का पूरा दिन फोन पर बात करने में ही जाने लगा।
फिर धीरे-धीरे बड़े बूढ़ों के मुंह से यह सुनने लगे कि हमारा तो चैत्र में आता है नया साल पता तो था पर कभी मनाया नहीं था।

यह करीब चार-पांच साल पहले की बात है  नए साल पर हम मुंबई में थे और हमने नए साल को मनाया, यह वाला 1 जनवरी वाला नहीं ;जो चैत्र के महीने में पहले नवरात्रे को होता है। उत्तर भारत में पहला नवरात्रा है बस इसी की धूमधाम और तैयारी में हम रहते हैं क्योंकि हमें याद नहीं रहता ना कि चैत्र के महीने से हिंदू कैलेंडर शुरू है, हमें तो 1 जनवरी याद रहता है।  मेरे विचार नए साल के लिए बदल गए भारतीय परंपरा में नया साल मतलब के चैत्र का महीना जिस दिन होता है पहला नवरात्र एवं आध्यात्मिक तौर पर उसे मनाते हैं। मराठी में गुड़ी पड़वा कहते हैं। तोरण से यह फूलों से घर को सजा कर पूजा पाठ करके उस दिन बहुत खुशियां मनाई जाती है वहां।

और धीरे-धीरे 1 जनवरी  वह भाव नहीं रहे नए साल वाले दिन क्योंकि हम समझ सके थे कि कुछ बदला ही नहीं ठंड और बढ़ गई है सब सिकुड़ रहे हैं जबकि जब चैत्र का महीना आता है तो रितु बदल जाती है ,मौसम खुशगवार हो जाता है , तरह तरह के फूल खिल जाते हैं और सच में लगता है कि  साल बदला नहीं नया साल आ गया।

2020 आते-आते महानगरों की यह हालत हो गई है कि नए साल पर जितनी शराब और ड्रग्स दिल्ली-मुंबई शहरों में आती है इतनी पूरे साल भी दुनिया के एक बड़े हिस्से में नहीं पहुंचती।
अब नए साल का मतलब बहुत ही गंदे तरीके से भड़काऊ गानों पर नाचना, नशा करके पूरी रात सड़कों पर घूमना नौजवानों के लिए कि नहीं नए साल  की परिभाषा हो गई । अब इस तरह की बातें हम हो गई नए साल की रात को भी कोई सोता है, नए साल को भी नशा नहीं करोगे? मस्ती में नहीं रहोगे और 1जनवरी अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार जिस दिन नया साल होता है उस दिन वह लोग नशे में धुत पड़े होते हैं।

अब समय आ गया अपने जीवन मूल्यों को भावी पीढ़ी को याद दिलाने का और हमने यह प्रण लिया कि हम यह नया साल मनाएंगे ही नहीं और 2021 में भी हमने बिल्कुल नहीं मनाया। हां यह था जिस ने बधाई दी उसको बदले में बधाई दे दी जो कि किसी तरह भी देखिए 2020 से 2021 में तो हम ही हैं और ऐसी कोई हमें मनाही नहीं है, खुशियां कभी भी मना लो, खाना खाने चले गए ।

लेकिन जो सबसे बड़ा वादा मैंने अपने साथ किया है कि अंग्रेजी नए साल को मैंने एक प्रण लिया है कि हर साल अब हमें अपना हिंदू पंचांग वाला यानी चैत्र के महीने का पहला दिन नए साल की तरह भी मनाना पड़ेगा इसका भी एक कारण है

आपने देखा होगा कि कुछ सालों से सोशल मीडिया पर इस तरह के मैसेज वायरल होते हैं कि हमारा साल नहीं है ।हम क्यों मनाए ?लेकिन बच्चे इस बात को समझ नहीं पाते तो फिर हम कब मनाए तो उनको एक विकल्प देना जरूरी है हर चीज को जड़ों से जोड़ना हो सके केवल मना करने से नए साल की पार्टी और रोकने से वह लोग नहीं मानेंगे और ज्यादा भड़क जाएंगे

इसलिए हमें चाहिए कि हम चैत्र के महीने के पहले दिन को नए साल के रूप में अच्छे से मनाएं
जब हम बनाएंगे तो बच्चों को अच्छे से ज्यादा भी रहेगा
आध्यात्मिक तौर पर मनाए अच्छे-अच्छे वादे खुद से करें कि नए साल की शुरुआत आप पूजा पाठ से करें ना कि नशे वाली पार्टी से।

2021में 13 अप्रैल को हिंदू पंचांग का नववर्ष है





             वंदना शर्मा