दिव्या नींद में जोर जोर से चिल्लाने लगी बचाओ बचाओ मुझे मत मारो उसकी मां किचन से भागते हुए आई क्या हुआ दिव्या कोई बुरा सपना देखा क्या ? दिव्या बुरी तरह हॉफ रही थी उसका चेहरा पसीना पसीना हो रहा था क्या हुआ बेटा नींद में तेरे चिल्लाने की आवाज सुनकर मैं दौड़ी दौड़ी आई। मां मुझे लग रहा था किसी आदमी को बहुत सारे लोग चाकू से मार रहे हैं उस पर सैकड़ों चाकू का बार किया जा रहा था। मां ने डांटते हुए कहां और मारधाड़ बाली पिक्चर देखा कर उसी का नतीजा है जो बुरे सपने आते हैं। दिव्या यह सुनकर हंस पड़ी। मां मुझे  कुछ याद भी नहीं है आगे क्या हुआ आगे मैं बताती हूं ना शैतान मैं डर कर भागी  भागी आयी कहीं घर में चोर उचक्के तो नहीं घुस आए। चलो यह सब छोड़ो बताओ कल कॉलेज जा रही है ना हां मां कॉलेज शुरू हो गए हैं ठीक है पढ़ाई लिखाई पर ध्यान दो जब देखो तो पेंटिंग बनाते रहती हो नहीं तो मारधाड़ बाली फिल्म देखते रहती हो मां मेरा आप भी ना जब देखो टांग खींचते रहती हो मैं पढ़ाई भी करती हूं अभी छुट्टियां चल रही है अभी से 20 दिन पहले रिजल्ट ही तो निकला है ‌।अच्छा ठीक है बेटा शाम हो गई है पापा आने वाले होंगे। मैं तेरे लिए और पापा के लिए सूजी का हलवा बना देती हूं यह कहते हुए दिव्या की मां किचन में चली गई। दिव्या पापा का इंतजार करने लगी मां थोड़े चिप्स भी तल देना थोड़ा नमकीन भी हलवे के साथ अच्छा लगता है। कुछ देर में दिव्या के पापा आ गए और बता बेटा आज का दिन कैसा गया पापा घर में रहते रहते टीवी देख कर बोर हो गई  अब तो रात हो गई मन कर रहा है कहीं घूमने जाए। हां तो मैंने कब मना किया है दिव्या की मां ने कहां कल से वैसे भी कॉलेज जा रही है मन बहल जाएगा तेरा हां मांआपने सही कहा मेरे दिमाग से तो यह बात निकल  गई थी। अगले दिन दिव्या कॉलेज के लिए तैयार हो रही थी मां मुझे कुछ पैसे चाहिए अलमारी में रखे हैं तेरे जितने इच्छा हो ले लेना। अलमारी में से दिव्या ने 1000 के नोट ले लिया। चलो कॉलेज जाने में देरी हो रही है यह कहते हुए वह घर से बाहर सड़क पर निकल गई। कुछ ही मिनट बाद ऑटो रिक्शा आकर रुकी भैया विवेकानंद कॉलेज चलोगे क्या जी उधर ही जा रहा हूं  बैठ जाइऐ। कॉलेज के सामने रुकने के बाद कितने पैसे हुए जी 12 रुपया दिव्या बैग में से पैसे देते हुए कॉलेज के कैंपस में आ गई। सोनल रिचा परी अनु सारी दोस्तों का देख कर दिव्या का मन खुशी से झूम उठा अरे दिव्या कॉलेज की छुट्टियां बिताने के बाद घर में रहकर खा खा कर मोटी हो गई हो। अच्छा तुम लोग तो नहीं कहती यह कभी मोटी नहीं होगी। स्मार्ट लग रही हो तभी परी ने मुस्कुराते हुए कहा। तुम लोगों को बहुत मिस किया घर पर रहते हुए बहुत दिनों बाद मिले हैं चलो कहीं कॉलेज केछुट्टियां खत्म होने के बाद बाहर चले। दिव्या और उसके सभी सहेलियां शाम में होटल में गए खाने पीने के बाद शॉपिंग करने का प्लान बना। दिव्या को एक मनमोहक पेंटिंग पसंद आए पेंटिंग देख कर वह खो गए एकदम से उसे कुछ बेचैनी से महसूस होने लगी भैया यह पेंटिंग पैक करके दे दो। शाम को जब घर कॉलेज से लौट के आई मां को पेंटिंग दिखाएं क्या बेटा इस पेंटिंग में क्या दिखा तुझे एक लड़के का पेंटिंग उसमें उसका चेहरा भी नहीं दिख रहा बावली हो गई क्या एक भगवान का पेंटिंग लेआती तो अच्छा होता। पता नहीं मुझे कुछ अजीब सी लगी मैंने ले लिया मेरा उस समय मन में कुछ अजीब सा हो गया था मुझे ठीक से याद भी नहीं है मैंने उसका पैसे दिए कि नहीं यह कहकर दिव्या अपने कमरे में चली गई। ओफ्ओ यह लड़की भी ना कभी कुछ बोलती है जब पेंटिंग पसंद ही नहीं थी तो लाइ क्यों? दिव्या अपने कमरे में बैठकर पढ़ रही थी उसका मन हुआ पेंटिंग को कमरे में लगा दिया जाए। वह पेंटिंग को दीवार पर टांग दी रात को सोते समय पेंटिंग को ध्यान से देख रही थीं तभी उसे  लगा पेंटिंग का वह लड़का उसके सामने आकर उससे बातें कर रहा है एक पल को लगा शायद वह सपना देख रही है पेंटिंग में वह लड़का बता रहा था दिव्या मैं दुनिया छोड़कर जा रहा हूं मुझे दंगे में मार दिया गया है मैं निर्दोष हूं बस मेरा कसूर है मैंने लोगों को बस इतना ही कहा धर्म के नाम पर लड़ाई मत करो सब का खून एक ही हैं पर लोगों ने मेरे ऊपर सैकड़ों चाकू से वार किया तुम अपना ध्यान रखना मेरीदोस्त। दिव्या घबरा गई उसे एक पल लगा क्या वह सपना देख रही है कोई नौजवान युवक गोरा चिट्टा उसकी आंख के सामने साक्षात खड़ा है और उसको समझा रहा है तुम अपना ध्यान रखना मैं तुम्हारा शुभचिंतक हूं मैं अब दुनिया छोड़ कर चला जाऊंगा। रात में दिव्या को ऐसा लग रहा था जैसे उसके ऊपर सैकड़ों चाकू से बार किया जा रहा हो इसके पूरे शरीर में जख्म जैसा दर्द हो रहा था वह समझ नहीं पा रही थी वह दर्द के मारे चिल्लाने लगी वह उठ कर बैठ गई उसने टेबल पर से पानी का गिलास उठाया पानी पिया उसका मन रह रह कर बेचैन  हो रहा था। दिव्या मन में सोचने लगी रोज रोज सपने मुझे क्योंआते हैं। इसका वास्तविक जीवन से कनेक्शन है वहसमझ ही नहीं पा रही थी अभी जिस पेंटिंग में वह लड़के से बात कर रही थी क्या वह सपना था हकीकत। मम्मी ठीक कहती है तू ना बहुत हॉरर पिक्चर और मारधाड़ वाले देखती हैं इसीलिए तुझे यह सब फालतू के सपने आते हैं। रात काफी हो गई थी दिव्या चादर ओढ़ कर दोबारा सो गई। अगले दिन उसकी नींद सूरज उगने के बहुत देर बाद खुला ओ दिव्या तू चैन की नींद सो रही है मैं दुनिया छोड़कर जा चुका हूं दिव्या नींद में बड़बड़ाना लगी मैं आपको नहीं जानती वह बेचैन होकर उठी। अपने कमरे से दिव्या बाहर निकली आज उसका मन सुबह से बहुत ही बेचैन और व्याकुल था पता नहीं मम्मी आज सुबह से मन परेशान है अजीब सा मन लग रहा है ठीक है तू ब्रश कर ले मैं तेरे लिए चाय बना कर लाती हूं। दिव्या फ्रेश होने के बाद हाथ में समाचार पेपर और दूसरे हाथ में चाय का प्याला लिए हुए न्यूजपेपर पढ़ने लगी समाचार पेपर के हेड लाइन में खबर छपी थी धर्म के नाम पर दंगे होने के कारण एक 25 वर्ष का नवयुवक को सैकड़ों बार चाकू भोंक कर निर्मम हत्या यह देखकर दिव्या चौक पड़ी उसे ध्यान से उस लड़के का फोटो देखा तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ यही लड़का तो मेरे सपने में आता था। दिव्या बार बार सोच रही थी मेरा इससे क्या रिश्ता है उस पेंटिंग को देखकर उसे कुछ अजीब सा क्यों लग रहा था। जिस जगह का खबर छपी थी वह जगह जिंदगी में कभी गई भी नहीं थी ना उस लड़के को कभी देखा था फिर सपने में आने का क्या संकेत हो सकता है ‌ वह हैरान और आश्चर्य चकित  थी उसके लिए यह सपना  और पेंटिंग रहस्य बन चुका था। दिव्या की आंखों में आंसू आ गए वह घर वालों को बताना नहीं चाहती थी लोग
 पागल या नाटक कर रही है बता कर कहीं लोग मेरा मजाक  ना उड़ाने लगे । आज तक दिव्या को समझ में नहीं आया इस रहस्य के बारे मे पहेली पहेली बनी रह गई। दिव्या इस राज को अपने दोस्तों से भी शेयर करना नहीं चाहती थीं लोग उसे बावली या नौटंकीबाज ना समझ बैठे। कभी मन में विचार आता तो यह सोच कर अपने मन को तसल्ली देती शायद पुनर्जन्म का संबंध हो?...... 

                      सपना कुमारी
                       पटना बिहार