प्रेम एक खूबसूरत अभिव्यक्ति है! जीवन बिना प्रेम के तो बीत ही नहीं सकता!
प्रेम किसी दिन या तारीख की मोहताज नहीं होता,बल्कि,इस संसार के प्रत्येक जीव प्रेम की भाषा समझते हैं! भगवान कृष्ण की बाँसुरी की एक धुन पर, पशु पक्षी, लोग, पेड़ पौधे सभी झूम उठते थे! प्रेम समझने वाले इंसान को,सुबह की पहली किरण से लेकर, गोधूलि बेला की शाम से भी प्रेम होता है!
शाम के समय, आकाश में उड़ते पक्षी, जो वापस अपने घोसलों को लौटने वाले होते हैं, उन्हें देख कर भी मन उन्माद से भर उठता है! जिन लोगों के दिल में प्रेम रहता है, वह लोग कभी भी कहीं भी अपने व्यवहार और बातों से किसी की भावना को ठेस नहीं पहुँचाते!
इतना ही नहीं, प्यार, मोहब्बत, जुदाई, इंतजार, समर्पण, अपने को हार कर किसी को जीत दिलाने की खुशी क्या होती है, यह महसूस करना! ये उन्हें ही समझ आती है, जो दिल के सच्चे होते हैं!
प्रेम का अर्थ सिर्फ दो विपरीत लिंग वाले स्त्री और पुरुष के बीच होना नहीं होता!
प्रेम का अर्थ, इस पूरे संसार में निहित वस्तु से है! प्रकृति से है! ईश्वर के बनाये सभी जीवों से है!
प्रेम, जाति, धर्म, मजहब से ऊँचा होता है! अगर ऐसा नहीं होता तो, रसखान, भगवान श्री कृष्ण के परम भक्त ना होते! हर इंसान के अंदर प्रेम है!
इस दुनियां में हम प्रेम के बल पर और एक दूसरे के सहयोग से ही चलते हैं!
प्रेम की सबसे अच्छी परिभाषा!
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जब अस्पताल में हमें खून की जरूरत होती है!
वहीं हमें प्रेम का असली रूप पता चलता है!
क्योंकि, खून की कोई जात नहीं होती!
प्रेम का प्रतीक लाल रंग होता है!
और खून सिर्फ और सिर्फ लाल होता है!
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श्वेता कर्ण!
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