कभी कभी अपने पर गुस्सा आता है, कभी कभी अपने पर प्यार।
कभी रोता नहीं मन किसी बात पर,कभी यूं चीखने चिल्लाने को जी चाहता है।
कभी कभी अच्छा लगता है खिलखिला कर हसना,कभी सारे जग को हसाने को जी चाहता है।
कभी कभी अच्छा लगता है आकाश में उड़ना,कोयल जैसा मीठा गीत गाना,मोर जैसे नाचना
कभी शोर मचाने को जी चाहता है।
कभी कभी अपने लगते है बेगाने से,कभी बेगानो को अपना बनाने को जी चाहता है।
कभी कभी ये जीवन भी छोटा लगता है, कभी कभी नया जन्म लेने को जी चाहता है।
- हरप्रीत कौर

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