आ गया  फ़िजा में , गुलाबों का   मौसम।
आशिकोंं के अनोखी,  चाहतों  का मौसम।

दिखाता गुलाब  इश्क की, नायाब़ तस्वीरें।
देखता नहीं कभी , कि कौन   सा   मौसम।
  
हर  तरफ़  महक रही  , गुलाबों  की खुशबू।
इत्र से डूबा हुआ , गुले गुलज़ार ये  मौसम ।

कोई  एक गुलाब देता ,  कोई पूरा गुलदस्ता।
कई तरह से दिखाते ,दिले जज्बात ये मौसम।

तुम्हें एक गुलाब देने की,मेरी दिली तमन्ना है। 
ये पूरी होगी, रहेगी अधूरी न जाने ये मौसम।

कभी-कभी  इस दिल  में,  होती आरजू।
आ जाती मेरी पहलू मेंं, मौसम बे मौसम।

तेरे हर अंदाज में ,वो कशिश है जाने जां।
दिल  हो जाता  ये ,बेअंदाज़  हर  मौसम।

आउंगा शामें  महफ़िल में,सुर्ख गुलाब लेकर।
कर लेना इश्के  इकरार,  सरेआम ये  मौसम।

        स्नेहलता पाण्डेय
            नईदिल्ली