वाह रेल का सुहाना सफ़र,
अदभुत सफ़र,
नीला आसमां सुहाना सफ़र,
हरे भरे वृक्षों की कतारें,
मस्त पवन पुरवाई सुंदर सफ़र,
अरुण लिए अरुणाई,
लेकर रथ करने अगुवाई,
फिर हुआ शुरु बस का सफ़र,
घुमावदार अदभुत नज़ारों का सफ़र,
ऊपर पर्वत नीचे तल छट खाई,
हाऊसबोट का सुंदर नज़ारा,
पहाणी खूबसूरत बालायें,
सुंदर डल झील अप्रतिम मनोरम,
कश्मीर की कली रुप सुंदर,
सुंदर मनोहारी वेशभूषा,
सुंदर स्वर लहरी,
गुल गुलिस्ताँ गुलबाग बयां,
हँसीं ख्वाब शायर का,
गुलर्मग सोनर्मग का,
वों हँसीन नज़ारा,
अप्रतिम शोभा निराली,
रसीले सेव रसदार कश्मीरी,
बागानों की खूबसूरती,
चीड़ चिनार देवदार,
घने वृक्षों की छाया,
निशातबाग,शालीमार,चश्माशाही,
वाह क्या...? खूब नज़ारा,
कश्मीर की ये वादियां,
स्वर्ग सा नज़ारा ।
काव्य रचना -रजनी कटारे
जबलपुर (म. प्र.)

0 टिप्पणियाँ