किसी तरह मेरे हो जाओ ना
तुम मुझे मिल जाओ ना
तुम मेरा नसीब बन जाओ ना
आ जाओ ना
आ जाओ ना !!!

देखो, बसंत भी आ गया है
बहार बनकर डालियों पे छा गया है
फूलों की खुशबू से महक उठा है मन,
पतझड़ आने से पहले, आ जाओ ना
तुम मुझे मिल जाओ ना,
तुम मेरा नसीब बन जाओ ना 
आ जाओ ना,
आ जाओ ना !!!!

महकने लगे हैं शब्द तुम्हारे कानों में
स्पंदन तुम्हारे ह्रदय का , स्मृति में समा गया,
हाथों की छुअन का मरमरी एहसास 
आवृति की तरह बार बार आने लगा,
पुनरावृत्ति होने से पहले ,
  आ जाओ ना ,
तुम मुझे मिल जाओ ना 
मेरे हो जाओ ना 
आ जाओ ना 
आ जाओ ना !!!

मिलना हमारा खुदा को मंजूर था,
मिलकर बिछुडना भी हमारा नसीब था,
चलो, सहेज लें उन लम्हों को,
जो याद बन गए
आंखो की नमी को छुपाए,
धड़कन हर सांस में समाए,
ख्वाब तेरे पलकों में बिठाए,
तेरी यादों का बिछौना,
ओढ़कर सो जाऊं मैं,
सुबह होने से पहले, हकीकत बन जाओ ना, 
आ जाओ ना 
आ जाओ ना !!!

किसी तरह मेरे हो जाओ ना,
तुम मुझे मिल जाओ ना
मेरे नसीब में आ जाओ ना ,
आ जाओ ना 
आ जाओ ना !!!!! 
   
       कीर्ति चौरसिया 
जबलपुर ( मध्य प्रदेश)