"दोस्तों की महफ़िल" ठिकाना हमारा
हँसमुख  दोस्तों से याराना हमारा

न हो जब तक उनसे बातें दो- चार
न आता हमारे ह्रदय को करार

वो दोस्तों का आपस मेंलड़ना-झगड़ना UPबनाम MP पर यूँ ही तकरारकरना

शाम होते ही सबका ठिकाने पे मिलना
एक कप चाय का यूँ ही इसरार करना

कभी किसी पहेली को हल कर धाक जमाना
कभी शेरो- शायरी की महफ़िल जमाना

बहुत खूबसूरत ठिकाना हमारा
उतना ही सुंदर याराना हमारा

कभी कम न हो ये प्यार हमारा
आबाद रहे सदा ये ठिकाना हमारा।।

आशा झा सखी ✍🏼