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संजोके रखती हूं मै पलकों में अपनी, 
वो सुहानी यादें वो कसमें वो वादे,
 
लिखी थी जो तुमने पहली कविता,
तेरी इन बातों ने दिल मेरा जीता,

कविता को पढ़कर याद आती तुम्हारी,
उसकी लिखावट में यादें हमारी, 

संजोके रखती हूं पलकों में अपनी,
वह सुहानी यादें वह कसमे वादे,

ये दिल का रिश्ता है मेरा तुम्हारा,
बडा ही पाकीजा है रिश्ता हमारा,

   की है मोहब्बत सनम मैंने तुमसे,
खता क्या हुई है जरा बोलो हमसे,

करूंगी ना कोई शिकवा शिकायत,
समझा करो कभी मेरी भी हालत,

खता क्या हुई है जरा बोलो हमसे,
खामोशी तुम्हारी मैं सह ना सकूंगी,

कितनी तो मन्नते  कर ली है तुमसे,
हो जाऊंगी रुसवा एक रोज तुमसे, 

चलेगा ना जब तेरे नखरे का जादू ,
ना होगा कभी तेरा फिर मुझ पर काबू,

आओ चलो जिद छोड़ो ये अपनी ,
संजोके रखूंगी मै पलकों में अपनी,
          
संगीता वर्मा✍✍