वफ़ा का फ़लसफ़ा ऐसे निभाया है बहुत हमने।
तुम्हारी याद में ख़ुद को रुलाया है बहुत हमने।
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हुए बरबाद हम रिश्ता सनम तुझसे निभाने में।
तुम्हारी चाह में ख़ुद को सताया है बहुत हमने।
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मुहब्बत को निभाया उम्र भर हमने मुहब्बत से।
तुम्हारे इश्क में खुद को मिटाया है बहुत हमने।
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नहीं तुझको ख़बर क्या बेबसी होती है चाहत में।
तभी तो उम्र भर तुझको मनाया है बहुत हमने।
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तुम्हारी याद का लम्हा सजाया जिन दरख़्तों में।
तुम्हारा ख़्वाब आँखों में सजाया है बहुत हमने।
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बहुत टूटे बहुत बिखरे नहीं भूले कभी तुझको।
दर्द-ओ-ग़म से ही रिश्ता निभाया है बहुत हमने।
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हुए नासूर ज़ख्मों को सनम अब तो हवा न दो।
तुम्हारे दर्द को अपना बनाया है बहुत हमने।।
@ मणि बेन द्विवेदी
वाराणसी उत्तर प्रदेश

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