आलोक का बचपन बहुत गरीबी मे बीता ।।कभी भूखे पेट तो कभी नमक रोटी भी है खाकर  सोया।।अपनी पाँच बहनों का सबसे छोटा भाई ,सबसे होनहार पढने मे
बहुत होशियार था।। आलोक के माँ पिताजी गरीब होने के बावजूद भी, आलोक.की मेहनत और पढाई की लग्न को देखकर उसे हमेशा प्रोत्साहित करते और उसे खूब
मन लगाकर पढने को कहते।।जीवन मे हौंसला रखकर मँजिल तक पहुंँचने के लिए प्रेरित करते।।

आलोक.भी दिन रात एक करके खूब दिल लगाकर
पढ़ता।।संघर्ष करते हुए सफलता की सीढी चढ़ते गया।।
फिर उसनें जीवन मे मुड़क़र कभी नहीं देखा।।
जीवन मे कई तरह की पऱेशानियाँ आई ,लेकिन आलोक निरंतर प्रयास करता रहा।।

उसने अपने जी तोड़ मेहनत से बहुत सी डिग्रियांँ हासिल
कर ली।। उसे एक अच्छी सी कम्पनी मे जाँब मिल गई।।जब उसे अपनी पहली तनख्वाह मिली बहुत खुश 
हुआ उसने अपनी तनख्वाह को अपने माँ पिता को समर्पित कर दिया।।

ये देखकर आलोक के माँ पिताजी के आँखो मे खुशी के आँसू आ गए।।अपने बेटे को खूब शाबाशी दी खूब आशीष दिया।।
" और कहा तुमने मुझे अपनी पहली कमाई लाकर दिया मै तो धन्य हो गया"..
ईश्वर ने मुझे इतना सुपात्र पुत्र दिया...

आलोक हमेशा सोचता था कि बचपन में वो जितना तरसा है ,वह अपने परिवार को उतनी ही खुशियांँ देगा अपने मांँ-बाप का हर सपना क़ो पूरा करेगा।।जितने
गम और दर्द सहे है,छोटी छोटी चीजों के लिए जितना
तड़पा ,वो अपनी मेहनत से खुशियाँ ही खुशियाँ बिखेर देगा।।इसलिये वो जी तोड़ मेहनत करता ,ना खाने पीने
का खयाल रखता ,बस रूपए कमाने का फितूर रहता और खुशहाल जिन्दगी की कल्पना करता।।


अपनी कमाई के पैसे से धीरे धीरे जमा करके  उसने एक छोटा सा सुंँदर  सा  घर बनवाया।। बहनों की शादी करवाई।।जिसे देखकर आरजू के माँ पिताजी फूले नहीं
समाए और अपने बेटे को उसकी तरक्की के लिए
खूब सारा आशीर्वाद दिया।।

आलोक के पिता ने अपने बेटे के लिए अपने दोस्त की बेटी से शादी करवाने का फैसला किया ।।उन्होंने अपनी इच्छा अपने बेटा के सामने रखी ।।

आलोक ने कहा" जैसी आपका मन मुझे कोई दिक्कत नहीं है "।।उसके पिताजी आलोक के मुहँ से ये बात सुनकर बहुत खुश हुए और उसे गले लगा लिया।। 

आलोक के पिताजी ने अपने दोस्त से कहा आलोक तैयार हो गया है शादी के लिए .....
अब ये दोस्ती रिश्तेदारी मे बदल जाएगी मै बहुत खुश हूँ।।

आलोक अपने माँ पिताजी के साथ लड़की देखने जाता है।।शमीता को देखकर उसकी खूबसूरती का कायल हो जाता है।।थोड़ी देर दोनो एकदूसरे से बात करते है।।शादी के लिए हाँ कर देता है।। 
आलोक बहुत आनंदित था, अपने जीवन को सतरंगी रंगो से शमीता के साथ बुन रहा था।।

लेकिन कहते है न किस्मत भी खूब खेल खेलती है,
वही आलोक के साथ हुआ।।

लेकिन शादी की रात शमीता अपने प्रेमी के साथ भाग जाती है क्योंकि वह और किसी से प्यार करती थी ।।किसी से भी कहने से डरती थी ।।
जब शमीता के पिताजी को खबर लगी, शादी को छोड़कर उनकी लाडली बिटिया अपने प्रेमी के साथ
भाग गई है वो बहुत आहत होते है ।।अपने दोस्त को
बताते है,दोनो डर भी रहे थे कि वो आलोक को किस मुहँ से कहे क्योंकि उन्हें भी इल्म था की आलोक शमीता से बेहद प्यार करने लगा है।।
दोनों दोस्त घबराते हुए आलोक को बताते है सुनकर वो हतप्रद हो जाता है ,आँखो से आसूँ झरझर बहने लगते है।।
आलोक कहता है कि अगर  ऐसी ही बात थी तो  वह मुझे बता सकती थी मैं खुद उसकी मदद कर देता । लेकिन उसने मेरे साथ बहुत गलत किया मुझे सपना दिखाकर धोखा दे दिया ।। शमीता के पिताजी आलोक से हाथ जोड़कर माफी मांँगते हैं ।।
आलोक कहता है" इसमें आपकी कोई गलती नहीं है कृपया आप मुझे शर्मिंदा ना करें"

शमिता के पिताजी कहते हैं आलोक से ,"अब मेरी इज्जत तुम्हारे हाथ में है तुम मेरी छोटी बेटी पलक से शादी कर लो मानता हूंँ वह तुमसे बहुत छोटी है लेकिन यह मेरी इज्जत का सवाल है"....

लेकिन शमीता के पिता के आग्रह करने से चूंकि वह उसके पिताजी की दोस्त की बेटी थी आलोक उनकी छोटी बेटी " पलक" से शादी करने के लिए बेमन से तैयार हो जाता है।।जो आलोक से दस साल छोटी थी।। लेकिन पलक के पिता भी मजबूर थे, अपनी इज्जत की खातिर उन दोनों की शादी करवा देते है।।

शादी के बाद आलोक और पलक आपस मे बात करने से हिचकिचाते थे।।थोड़ी बहुत ही बात होती थी।। दोनों एक दूसरे से खींचे खींचे रहते थे ।।जब भी बात होती आलोक सदा पलक को आगे पढने के लिए प्रेरित करता।।अपने माँ पिताजी से सलाह मशवरा करके पलक का एडमिशन करवा देता है ।।पलक ने  ग्रेजुएशन कंप्लीट कर लिया था तो वह उसे B.Ed के लिए फार्म ला कर दे देता है।। और उसकी पढ़ाई में खूब मदद भी किया करता था।।आलोक की मदद से  B.Ed क्लियर करने के बाद उसे सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल के पद पर जॉब मिल जाती है जिसे वह बखूबी संँभाल लेती है।।



शुरु शुरु में तो दोनों को अपना वैवाहिक जीवन को शुरू करने में समय लगा फिर धीरे-धीरे दोनों एकदूजे के करीब आ जाते है।।प्यार के सुहाने सफर मे दो शरीर एक प्राण.हो जाते है।।जीवन की गाड़ी पटरी पर आ गई।।  उन दोनों के दो बच्चे हुए एक बेटा एक बेटी।। आलोक और पलक अपने बच्चों से खूब प्यार करते।।अपने बच्चों की सारी खवाइशो और पढाई का खूब खयाल भी रखते।।

आलोक अपने  माँ और पिताजी से बहुत प्यार करता था और इज्ज़त भी।। एक दिन उसके पिताजी की तबीयत बिगड़ जाती है  ।।डॉक्टर के पास  चेकअप करने के लिए लेकर जाता है।।  डॉक्टर  चेकअप करने के बाद कुछ टेस्ट करवाने के लिए लिखते हैं,टेस्ट से पता चलता है कि उसके पिताजी कैंसर के लास्ट स्टेज पर है और कुछ दिनो के ही मेहमान है।।

उसे बहुत दुख हुआ सुनकर उसका दिल धक से रह.गया ।वो अन्दर ही अन्दर बहुत टूट गया।। बहुत रोना चाहता है ,लेकिन  उसे उसकी जिम्मेदारीयाँ का ज्ञात था।।आलोक बहुत लाचार  महसूस कर रहा था।।
जितने दिन पिता जी जिवित थे वो और उनका
परिवार खूब सेवा करता।।

तीन माह के बाद आलोक के पिताजी का देहांत हो
जाता है।।

आलोक अपने पिताजी से बहुत प्यार करता था।।वही एक थे जो आलोक को बखूबी समझते थे, और जीवन मे आई कठिनाइयों से कैसे निवारण किया जाए उचित
अनुचित की सलाह दिया करते थे।।

पिताजी के गुजरने के बाद आलोक अपने आप को असहाय ,अकेला महसूस करने लगता है।।कोई भी दिन ऐसा दिन नहीं बीतता जिस दिन वो अपने पिता को याद ना करता हो ।। वो अपनी माँ  और परिवार के सामने रोकर कमजोर नहीं करना चाहता था।।

फिर भी उसे ऐसे कंधों की तलाश थी जिसके सामने वो खुलकर रोना चाहता था।।जब भी कोई जीवन मे परेशानी आ जाती, वो खामोश हो जाता क्योंकि उसे कोई राह दिखाने वाला नहीं था।।सही गलत की पहचान बताने वाला नहीं था ।।ना कोई शाबाशी देने वाला नाही कोई हाथ पकड़कर राह दिखाना वाला ।। ऐसे वक्त मे
वो खुद को बहुत अकेला महसूस करता।। अपने पिता
को बहुत याद करता।।

हर दिन अपने पिता जी की तस्वीर को प्रणाम करके हिम्मत बटोर कर आँखो मे नमी लेकर अपनी मंजिल की ओर निकल जाता।।

छःमहीने के उपरांँत उसके काम से उसके बॉस बहुत खुश होते हैं ,आलोक को प्रमोशन मिल जाता है और कंँपनी की तरफ से गाड़ी बंँगला मिल जाता है ,वह अपनी मांँ और अपनी पत्नी   बच्चे को उस घर में ले आता है और सब खुशी-खुशी रहने लग जाते हैं।।



                  ।। समाप्त।।



                    शिल्पा मोदी