रिश्तों को धन से मत तौलो
दिल के अपने, सब दरवाजे खोलो।
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दौलत नहीं कभी प्यार से बड़ी
हर ज़ख्म भरने, सदा समय खड़ी।
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दिल भर आये कभी, आंखों से रो लो
हर मुश्किल में , अपनो संग हो लो ।
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गलतियों पर भले तुम उठा लो छड़ी
सच के आगे झूठ, सदा ही बौनी पड़ी ।
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ज़िन्दगी को बस काटो नही, उसे जी लो
अच्छाइयों के आगे, सबकी बुराइयों को भूलो ।
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रिश्तो को धन से मत तौलो
दिल के अपने सब दरवाजे खोलो ।
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थ्रीमा विनोद साहू

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