कभी खामोश तो कभी मचलती है...!
ख्वाहिशें भी कमाल करती है..!!
कभी केद तो कभी आजाद है...!
जिम्मेदारीयाँ भी अपने कर्ज भरती है..!!
कभी हैरान तो कभी परेशान है...!
जिन्दगी भी हर मोड पर दर्द सहती है..!!
कभी इस तरफ तो कभी उस तरफ है...!
नदियां भी खामोशीसे बहती है..!!
कभी भरी तो कभी खाली है...!
आँखें भी सहमी सहमी सी रहती है..!!
कभी बंजर तो कभी हरियाली है...!
धरती भी दो बूंदों के लिए तरसती है..!!
टुट कर बिखर जाने के डर से...!
अब तो हर कली मुस्कराने से डरती है..!!
आरती सुधाकर सिरसाट
बुरहानपुर मध्यप्रदेश

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