वो बारिश का मीठा पानी, वो पानी की बुँदे।
जीवन सारे जहाँ के बचाती, वो पानी की बुँदे।
सागर इतना भरा हुवा, ना पीने के काम आये।
कारी बदरी ही लेकर आती, वो पानी की बुँदे।
आज बचाओ जितना, कल काम आयेगा यही।
वरना सारी तकलीफें लाती, वो पानी की बुँदे।
दिल भर जाये लोगो जब तुम्हारा गमों से तब।
आँख के जरिये भार घटाती, वो पानी की बुँदे।
एक दिन ऐसा होगा जब तरसे ही रह जाओगे।
होगी जो उसकी फुजूल खर्ची, वो पानी की बुँदे।
आज की पीढ़ी की गलती, कल वाले पछतायेंगे।
साफ़ कभी भी एक ना मिलेगी, वो पानी की बुँदे।
इतने बड़े समंदर और कुछ काम न आये पीने।
खारी खारी ना पाओगे पी, वो पानी की बुँदे।
एक कसम खालो सब, कि हर धर्म यही कहता।
हम सब को मिलकर बचानी, वो पानी की बुँदे।
अपने झगड़े छोडो, आनेवाले वक़्त से बचो।
चैनसे रहना, एक एक जोड़नी, वो पानी की बुँदे।
फिरोज दहिवाला

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