नैन भरा काजल से
काली मेंहदी,काली सुरमा
धूप की काली घटा बादल से
नैन भरा काजल से.....
रंग-उमंग "लली" है बसिया
रात चाँद की सजी तोह रतिया
मेंहक उठी,गुलाब की सुगंध से
नैन भरा काजल से.....
कुमकुम की,कोयल सी बोली
राह निहारे मधुर-शलौली
ता-ता थैयां "राग" से
नैन भरा काजल से.....
'मधु' बना गई,मधुवन की 'मख्खी'
छत्ते की हथियार बना 'घन'
मीठा रस गुलजार के
नैन भरा काजल से.....
लेखक:-विकास कुमार लाभ
मधुबनी(बिहार)

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