रीतु और भावेश की पहली सालगिरह थी, पर उस वक्त रीतु अपने सास-ससुर के साथ गाँव में थी और उसका पति कोई काम से अहमदाबाद में थे.... दोनों के लिए पहली सालगिरह थी तो वो उसे मिलकर यादगार बनाना चाहते थे लेकिन रीतु अपने सास-ससुर से यह बात कह ही नहीं सकी क्योंकि उसे पता था उसकी इस बात पर घर में बड़ा हंगामा खड़ा हो सकता था.. उस वक्त घर में सास अपने पीहर जाने की तैयारी कर रही थी क्योंकि उनके भतीजे ने जोधपुर में नया मकान लिया था और वह उनके घर प्रवेश में जाने के लिऐ सामान जमा कर रही थी।
रीतु आते-जाते उनको देखकर सोचती रही कि वो कैसे अपनी सास को बताए की कल उनकी पहली सालगिरह है और वह दोनों मिलकर उसे यादगार बनाना चाहते है.... तभी उसके पति भावेश का फोन आता है और वह अपनी माताजी से कहता है की उसके पास भी मामाजी का फोन आया था जोधपुर आने के लिए तो उसको आना पड़ेगा, आप रीतु को भी अपने साथ जोधपुर लेकर आ जाना.....इतने में सास बोल पड़ी-" इतने जनों का क्या काम है वहाँ..! मैं आ जाऊँगी सुबह जल्दी रवाना होकर, वह तो उठ ही नहीं सकती इतनी जल्दी मेरे से नहीं होगा उसको साथ में लेकर आना... और तुमको आना है तो आज रात को ही रवाना हो जाना.." सास ने फोन रख दिया।
सास पास ही खड़ी रीतु को घूर कर देखे जा रही थी साथ में ही बोल रही थी-" पता नहीं कहाँ से आई है चुड़ैल, जब देखो मेरे बेटे को लगाती- सिखाती रहती है तुमने ही बोला होगा उसको, उठ तो जाएगी क्या महारानी... मैं तो सुबह 5:00 बजे वाली ट्रेन में जाऊंगी।" रीतु खाना बनाती रही और उसकी सास उसे ताने मारती रही.. इस बीच उसकी सास के पास फिर से फोन आया।
भावेश:- हाँ मम्मी उसको भी लेकर आना बजरंग भैया ने बोला है कल शादी की पहली सालगिरह है तो वो भी मना लेंगे साथ में ही, उसको बोल देना आप वो उठ जाएगी सामान रात को ही जमा कर रख लेना ताकी सुबह देरी ना हो..।" अब उसकी इस बात पर सास मना नहीं कर सकी, बेटे को बोल दिया की ठीक है बोल दे इसको मैं सुबह इंतजार नहीं करुंगी। सास-ससुर के मशवरे के बाद आखिर रीतु का भी जोधपुर जाना तय हो गया, रीतु साथ में जाने वाली बात सुनकर बहुत खुश थी, उसने जल्दी से अपना काम खत्म किया, फिर जाने की तैयारी में लग गई। लगभग तीन महीने बाद वह अपने पति से वापस मिल रही थी तो उसकी खुशी भी थी, शाम को सास के साथ जाकर अपने पति के लिए गिफ्ट लिया, ससुर जी ने पहले ही कह दिया था की इसको मन पसंद की साड़ी दिलवा देना हमारी तरफ से भी, तो बेमन से ही सही पर उन्होंने एक साड़ी उसे भी दिलवाई। रात को सोते वक्त भी सास ही थी उसके पास तो जब तक सास को नींद नहीं आई तब तक वह रीतु को सुबह जल्दी उठने का बोलती रही, सास तो सो चुकी थी पर रीतु को आने वाले कल के बारे में सोचकर नींद ही नहीं आई, ऊपर से सास के बार-बार कहने के कारण वह बार बार समय देखे जा रही थी, आखिर सुबह का इंतजार खत्म हुआ, वह कभी इतनी सुबह शायद ही कभी उठी हो, हाँ अपने ससुराल में पहले दिन वह इसी टाईम पर उठी थी, या मानो तो पूरी रात करवटें ही बदलती रही।
वह 5:00 बजे नहा धोकर तैयार थी, अब वह सास की एक आवाज का इंतजार करने लगी, उस दिन भी उसकी सास उसे ताना मारने से बाज नहीं आई तो बोल पड़ी-" रोज तो जल्दी उठा नहीं जाता महारानी से, आज अपना काम पड़ा है तो कैसे उछल रही है।" कुछ देर में ट्रेन के आने का समय भी हो गया तो दोनों रवाना हो गऐ
लगभग 1:00 बजे वो जोधपुर पहुँच गऐ, इतने लोंगों के बीच रीतु की आँखे सिर्फ भावेश को ढूँढ रही थी...कुछ देर बाद सामने से अपने पति को आता हुआ देख वह मुस्कुरा उठी, उसके पति ने भी उसे एक झलक देख लिया था, रीतु उसके पीछे कमरे में गई पर उसे वहां कोई नहीं दिखा।
अचानक कमरे का दरवाजा धड़ाम से बंद हुआ, रीतु ने पलट कर देखा तो दोनों को हंसी आ गई, भावेश दरवाजा बंद किए बाहें फैलाए खड़ा था .. सबसे पहले दोनों ने एक दूसरे को सालगिरह की बधाई दी और भावेश ने उसे बताया की हम माउंट आबू जाने वाले हैं यह सुनकर रीतु बहुत खुश हुई.... भावेश ने कहा तुम जाकर मम्मी को यह सब बता दो हम अभी 2:30 बजे की बस से रवाना होंगे। रीतु अंदर गई वहां पर बहुत सारी औरतें बैठी थी वह धीरे से अपनी सास के पास जाकर बैठ गई और उसने उनको बताया कि हम अभी माउंट आबू जा रहे हैं 2:30 बजे की बस है यह सुनकर सास को गुस्सा आ गया और बोला बताया तो नहीं हमको ऐसे कैसे जा रहे हो, तुम लोग अपने आप ही कर लो सब.... मैं अभी उससे बात करती हूं ऐसा बोलकर वह सीधे उसके पति के पास जा पहुंची। वह भावेश को देख कर बोली....." क्यों रे हम लोगों को बताया तो नहीं अभी कब जाओगे और बहुत तेज बरसात भी हो रही है माउंट आबू में अभी मौसम अच्छा नहीं है और कभी चले जाना"....... "अरे मम्मी और कभी तो कब जाएंगे आज सालगिरह है तो मैंने सोचा आज चले जाते हैं, अभी बस है थोड़ी देर में हम दोनों निकल जाएंगे.....वापस कल आ जाएंगे आप चिंता मत करो" ऐसा बोलकर भावेश वहां से बाहर निकल गया|
पर उसकी सास को यह सब पसंद नहीं आया पर बेटे के आगे कुछ नहीं बोल पाई रीतु और सास सब लोगों के साथ खाना खा रहे थे सब लोगों के खाना खाने के बाद रीतु की सास ने उसे बर्तन धोने के लिए कहा घड़ी में 1:00 बज गए थे इतने सारे लोगों के बर्तन रीतु को अकेले धोने थे,अब सास के पीहर में किसी को मना भी नहीं कर सकती थी पर उसने किसी को कुछ नहीं कहा और चुपचाप बर्तन धोने बैठ गई मन ही मन में सोच रही थी कहीं उनको निकलने में लेट नहीं हो जाए।
कुछ देर में बर्तन धुल गए तब उसकी ननद वहां आई और बोला लाइए भाभी मैं आपकी कुछ मदद कर दूं पर रीतु ने बोला नहीं दीदी हो गया, उधर भावेश सब जगह रीतु को ढूंढ रहा था पर वह उसे कहीं नहीं मिली उसने अपनी मम्मी को भी पूछा पर उन्होंने बताया कि मुझे नहीं बता कर गई, घड़ी में 2:00 बज गए थे वह दोनों बस के लिए लेट हो रहे थे, तभी अचानक रीतु और भावेश आपस में मिल गए और भावेश उसका हाथ पकड़कर मम्मी के पास ले गया.... भावेश ने मम्मी को बताया कि हम लोग लेट हो रहे हैं इसलिए अभी निकल रहे हैं आप चिंता मत करना हम आराम से पहुंच जाएंगे पहुंचने के बाद आपको फोन करेंगे ठीक है उसकी मां ने कहा ठीक है आराम से जाना और फोन कर देना अपना ध्यान रखना।
बिल्कुल सही वक्त पर वे दोनों बस स्टेशन पहुंच चुके थे कुछ देर में बस रवाना हुई और वह दोनों बस की सीट पर एक दूसरे की बाहों में बाहें डाल कर बैठे थे उस समय शुरू हुआ उन हसीन वादियों का सफर जिन्हें भुला पाना शायद उन दोनों के लिए मुमकिन नहीं था,,,,, माउंट आबू आते आते पूरी बस खाली हो गई थी, रात भी हो गई थी ओर ठंड भी होने लगी थी, रीतु ने उसको बोला हमारा पूरा दिन तो बस में ही निकल गया, वैसे देखा जाए तो उन दोनों का ये पहला हनीमून ही था वो भी शादी के एक साल बाद तो दोनों इसे बहुत यादगार बनाना चाहते थे, वे दोनों बस में सबसे पीछे वाली सीट पर कम्बल ओढ़ कर सो गए,,,,, कुछ देर बाद दोनों माउंट आबू पहुंचे वे बहुत खुश थे। दोनों ने होटल में अपनी पहली सालगिरह मनाई, दूसरे दिन सुबह जल्दी दोनों माउण्ट आबू पर चढ़ाई के लिए रवाना हुए, बाईक राइडिंग.... झील, झरने और पहाड़ों के बीच का सफर बहुत सुहाना लग रहा था, नक्की झील का नजारा अपने आप में मंत्र-मुग्ध कर देने वाला था, वहां की हरियाली और बारिश की रिमझिम दोनों के प्यार को और मजबूत कर रही थी। पूरे दिन वह माउण्ट आबू में घूमते रहे कब सुबह से शाम हो गई उन्हें पता ही नहीं चला, उस सफर में मजे की बात ये रही की दोनों ने इसे यादगार बनाने के लिए एक शराब की बोतल साथ में ले ली.... पर जब इसे पीने की बारी आई तो वह दोनों के गले में ही अटक गई और दोनों ने एक साथ इसे थूक दिया.... और दोनों के मुंह से निकल पड़ा..." ये कितनी गन्दी है....छी.. और फिर दोनों खिलखिलाकर हँस पड़े.... यहाँ तक तो ठीक है हद तो तब हो गई जब दोनों शराब चढ़ने की एक्टिंग करने लगे... हालांकि ये सब भी उन्होंने उस पल को यादगार बनाने के लिए किया था.. दोनों ही अपने पहले हनीमून को सार्थक बनाने में लगे थे, होटल का कमरा... खिड़कियों से आती हुई बारिश वाली ठण्डी हवा... मंद-मंद जलती हुई लाईट.... एक सौंधी सी खुशबु और मखमली अहसास सभी कुछ यादगार बन गए थे उस दिन।
रंजना

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