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कुछ मीठी सी कुछ तीखी सी यादें,
मीठी सी यादों के वो प्यारे वादे,
तीखी यादों में की फरियादे,
रखते है संभाल कर मन की तिजोरी में आज भी,
क्या करें लेकिन यह कमजोरी है आज भी,
खोलना चाहते है इस तिजोरी को एक बार,
रुक जाते हैं लेकिन कुछ सोच कर बार-बार, 
डरते हैं जज्बातों से उन मीठी यादों से,
कहीं मन बेचैन ना हो जाए, 
याद जब किसी की आए,
मन को संभालना बड़ा मुश्किल होता है,
गहरा जटिल समुद्र के जैसा होता है,
लेकिन लहरों की हलचल से दुर्बल होता है, 
डरते हैं उन यादों से उन मन्नते फरियाद से, 
जो की थी कभी कहीं आंखें ना छलक जाए,
बिन बात का किस्सा ना बन जाए,
यह सोच कर रुक जाते हैं,
कुछ आगे बढ़ जाते हैं,
भूलना चाहते हैं हैं उन किस्सों को,
लेकिन कभी भुला नहीं पाते हैं,
                            
    संगीता वर्मा✍✍