जिन्दगी की आस हो , तुम,
प्यार का एहसास हो, तुम!
दिल के अरमान हो, तुम,
सपनों की उड़ान हो, तुम!
मेरी गीत के साज हो, तुम,
मेरे सर के ताज हो, तुम!
गीत मैं, आवाज हो, तुम!
रूप मैं, श्रृंगार हो, तुम!
जेठ की तपती दोपहर सी मैं,
और सावन मास हो , तुम!
धड़कन चलती है जिससे,
मेरी वो साँस हो, तुम!
श्वेता कर्ण!

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