इन आंखों को अब ,सावन की जरूरत नहीं
इन्हें बरसात लाने को, तेरी यादें ही काफ़ी हैं।

भरे बादल मगर बरसने की, इजाज़त नहीं
इक बूंद को छलकते,हज़ारों सवाल ही काफ़ी हैं।

खामोश कशमकश भी, कोइ खास वजह नहीं,
बिना शोर के हमें टूटने को तेरी बेरुखी ही काफ़ी है।

मुझे कुछ और पाने की,कोई बड़ी ख्वाहिश नहीं,
मेरे मुस्कुरा लेने को, बस तेरा नाम ही काफी है।

मेरे सुकूं में रहने का,कोई खास सामान नहीं
तेरे आस पास होने के, ये एहसास ही काफ़ी हैं।

तू कभी न आ इस गली में,यहां कोई परवाह नहीं
तेरे इंतज़ार में जीने का ये सिलसिला ही काफ़ी है।

"सारी खुशियों का तेरे साथ सिलसिला है,
तू एक नहीं जैसे तुझमें कोई काफ़िला है।"

….….✍️🙏🌅 ऋतु बाजपेई