स्त्री
नहीं
निर्बल
लड़ती है
हक के लिए
नित्य हर पल
है,अपार संबल ।।
हे
दुर्गा
पार्वती
सरस्वती
शक्ति सौम्यता
ज्ञान का भंडार
करती हो उद्धार ।।
हे
नारी
भंडार
ममता की
दर्द से वास्ता
युगों युगों रही
तुम्हारी यह दास्तां ।।
स्त्री
रूप
अनेक
जो तुम्हारे
माता भगिनी
पुत्री अर्धांगिनी
जीवन को संवारे ।।
हे
नारी
तुमको
सत - सत
मेरा प्रणाम
महिमा अपार
जीवन का आधार ।।
मनीषा भुआर्य ठाकुर
कर्नाटक
(एक छोटी सी कोशिश - विधि-पिरामिड, १,२,३,४,५,६,७ स्त्री जीवन को समर्पित)

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