⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘
कभी-कभी संगीत ही मन का---
हर पल  होता मीत ,
बजती तनहाई की बांसुरी, 
सुनते जब खामोशी के गीत,

खामोशी के गीतों में---
करके आंखें बंद,
सुनते रहते हैं सदा---
प्रेम के मीठे छंद,

उनको सुनकर हर पल---
मुस्काते हैं मंद मंद,
अंतरमन में हर पल--- 
रहता है एक द्वंद,

किसी को दिखती राधा अपनी,
और राधा को दिखते कृष्ण,

कौन है वो कहीं तो है ,
जो देखे अपनी राह,
नजर भर कर देखने की---
एक दूजे की चाह,

कभी-कभी संगीत ही ,
मन का होता मीत,
बजती है तन्हाई की बांसुरी,
सुनते हैं खामोशी के गीत,

              संगीता वर्मा✍✍