तुम्हारे खत में कई शब्द ऐसे आते हैं कि,
बिन  चूमें उन्हें रहा नहीं जाता।

 तुम्हारे अल्फाज ऐसे मन को भाते हैं कि,
 बिन झूमे मुझसे रहा नहीं जाता।

 प्यार खत में इतना ना लुटाओ !
 इतना प्यार भी अकेले सहा नहीं जाता।

तुम्हारी याद में इतना लिखते हैं कि ,
कैसे कहूं ! कुछ कहा नहीं जाता। 

पढ़ कर इन्हें आंखें छलकती हैं,
आंसू कभी बहते हैं,कभी बहा नहीं जाता।

लगता है हर शब्द, हर अर्थ तुम्हीं हो,
बिन तुम्हारे और रहा नहीं जाता ।

स्वर्गीय प्रेम शंकर पाण्डेय गोरखपुर