भारतीय महिलाओं को प्रणाम कीजिए #8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की अगली कड़ी में हम बात करेंगे 'उड़न परी' की
खेलती हुई, भागती हुई लड़कियों को देखकर उन्हें पीटी उषा कहा जाता है।
अपने नाम को इस तरह से जातिवाचक बना देना आसान नहीं होता है। कोई विरले ही अपनी मेहनत से कर पाते हैं।
ऐसे ही चुनिंदा लोगों में आती है पीटी उषा जी
*27 जून 1964 को भारत के केरल राज्य में जन्मी पीटी उषा का पूरा नाम पिलावुल्लकंडी थेक्केलेपराम्बील उषा है।
*'पय्योली ट्रैक', 'फील्ड की रानी' और 'भारतीय ट्रक' के नाम से जाने जाने वाली पीटी उषा का सफर इतना आसान भी नहीं था।
*1980 के हालात बिल्कुल अलग थे उस दौरान किसी ने सोचा भी नहीं था कि वह ओलंपिक में भाग लेगी।
जब वह शॉर्ट पहनकर दौड़ का अभ्यास करने जाया करती तो लोग भीड़ लगाकर उन्हें देखा करते थे।
*12 साल की उम्र से ही पीटी उषा ने श्री ओपी नब्बियारका के निर्देशन में खेल का प्रशिक्षण लिया और 1978 में केरल में हुए अंतरराज्य प्रतियोगिता में 3 स्वर्ण पदक हासिल किए।
*1982 के एशियाई खेलों में उन्होंने 100 मीटर और 200 मीटर में स्वर्ण पदक
*कुवैत में 2 स्वर्ण पदक
*1984 के अलाउंस एंजेल्स ओलंपिक में पीटी उषा ने चौथा स्थान प्राप्त किया
*ट्रैक एंड फील्ड मुकाबलों में लगातार पांच बार स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर पीटी उषा एशिया की सर्वश्रेष्ठ धाविका बन गई ।
*1985 में एशियाई दौड़ प्रतियोगिता में महानतम महिला धाविका के रूप में अपनी पहचान बनाई
*दौड़ में अब तक पीटी उषा को 101 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं
*1984, 1985, 1986 ,1987 में सर्वश्रेष्ठ धाविका की ट्रॉफी से नवाजा गया
*वर्तमान में पीटी उषा भारतीय रेलवे में कार्य करती है और भारतीय रेलवे के लिए भी है पहली बार था जब किसी पुरुष या महिला को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी खिताब मिला था
*1985 में जब जकार्ता में महानतम महिला धाविका की पहचान बनाई थी तो उस वक्त भारत के लोग अपनी दुकान पर लिखते थे हम उस देश के वासी हैं जिस देश से पीटी उषा ताल्लुक रखती थी तो जकार्ता के लोग सभी भारतीयों को बहुत इज्जत देते थे
पीटी उषा ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर देश में नहीं बल्कि विदेश की जमीन पर भी काफी नाम कमाया है और इसी कारण को प्रख्यात अर्जुन पुरस्कार भी मिला है भारत सरकार की ओर से सर्वोच्च सम्मान पदम श्री भी दिया गया है
*केरल में पीटी उषा ने स्कूल ऑफ ए प्लेस संस्था के द्वारा अपना वादा पूरा किया है ताकि युवा खिलाड़ी आगे बढ़ सके।
*पीटी उषा ने साबित कर दिया है कि लड़कियां किसी भी मामले में लड़कों से कम नहीं है उन्हें खुद पर गर्व होना चाहिए और हर खेल में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं
वंदना शर्मा🙏

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