मत किया करो हरकतेंअब तुम यह बच्चों वाली ,
उम्र नहीं रही तुम्हारी खिलौनों से खेलने वाली,
अब ना रहे वह जमाने न वो खिलौने रहे ,
बदल गया है मिजाज खिलौनों का और खेलने वाले।
का पहले एक ही गुड़िया से तमाम बचपन बिता देते थे आज बदले हैं, खिलौने तो जज्बे बदले हैं रोज लोग नए नए खिलौने तैयार करते हैं
पुरानी गुड़िया कहां किसी को भाती है जब कोई नई सजी संवरी गुड़िया नजर आती है ।ऐसे खिलौनों से खेलने से क्या फायदा जब तुम नई गुड़िया लाते हो तो पुराने गुड़िया उदास हो जाती है
हजारों नहीं काश तुमने भी हमारी तरह कोई एक खिलौना संभाला होता उसके दिल को न तोड़कर इस तरह न तोड़ डाला होता ।
सबके अपना बनाने की जिद में तुमने किसी की के भी हो न सके,
सारे खिलौने अपने करने की चाह में तुमने एक भी खिलौना अपना न किया ।
कितने ख्वाब देखे तुमने पर हकीकत एक भी सपना न किया,
छोड़ दो यह आदतें खिलौने बदलने की ,माना खिलौनों में दिल नहीं होते पर मैंने देखा है खिलौने उदास होते हैं। जब इन्हें छोड़कर तुम नए खिलौने अपनाते हो इनके मासूम से दिल पर अजीब से एहसास होते हैं। पर तुम्हारे बस की बात नहीं उनके जज्बे को पढ़ना इनको वही पड़ेगा जिनमें किसी को समझने की खयालात होते हैं ।
छोड़ दो तुम यह जिद खिलौनों को बदलने वाली उम्र नहीं रही तुम्हारी खिलौनों से बहलने बाली।
अंजू दीक्षित,
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।

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