चार दिशाओं  से चार बड़े भाई,
मध्य में बहना एक आई,

करके दुनिया से संघर्ष,
सबने अपनी मंज़िल पाई,
 

एक उत्तर में हिमालय सा, 
अटल ,अडिग, शीतलता सा,

गर्म आंधियां जब चली समय की,
गिरता हिम् वर्षा सा ,

रक्षा करता जैसे हिमालय,
वैसे ही वो रक्षक सा,

एक पूरब की घाटी सा,
निश्छल, निर्मल माटी सा,

एक पश्चिम की लाली जैसा,
निगरानी करता माली सा,

एक दक्षिण के सागर जैसा,
विशाल ह्रदय पावन सा,

बंधा रहे परिवार सूत्र में
निरंतर प्रयास यही किया ,

डिगा ना सका कोई उन्हें,
पथ भ्रष्ट ना कोई कर सका,

आत्मविश्वास, मनोबल इनका
रिश्ता ना कोई हर सका ,

तृण से लेकर तरु बने,
सदैव रही , तरुनाई ,

चार दिशाओं से चार बड़े भाई,
मध्य में बहना एक आई,

करके दुनिया से संघर्ष ,
सबने अपनी मंज़िल पाई !!

   कीर्ति चौरसिया
जबलपुर( मध्य प्रदेश)