जिंदगी
सचमुच फूलों का गुच्छा
ही तो है...
जिसमें सजे हैं
न जानें
कितने किस्म के फूल
अलग-अलग
रंगों वाले....
और
अलग अलग
खुशबूओं वाले....
फूल जो कभी
बन जाते हैं
किसी गुलदस्ते के साथी,
या फिर
सज जाते हैं
किसी की मजार पर,
कभी हो जाते हैं
वो मुक्त
पाकर भगवान के चरण.....
मुकेश दूहन
सोनीपत हरियाणा

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