'नदी' पानी के 'मोड़ों' को कहते हैं 
नित 'धाराओं' के संग चलती है 
इसको कोई रोक नहीं पाया 
संग जो आया,सो ले आया


      सुखार जब 'खेतीं' पर आती 
      बारिश आती 'बाढ़ों' को लाती 
      तब खेतों में पानी आती 
      सिंचाई सुलभ खेतीं 'लहराती'


सब इसका गुनगान करो 
पानी को 'भगवान' कहो



       लेखक:-विकास कुमार लाभ
                     मधुबनी (बिहार)