तुम्हें एक टक निहारूं तो दिक्कत,न निहारूं तो दिक्कत मुझे,
चलो अब मैं तुम्हें अनदेखा करती हूं।
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तुमसे कहकशें करूं तो परेशानी,नही करूं तो परेशानी मुझे ,
चलो अब मैं गुमसुम सी हो जाती हूं।
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तुम्हारा तारीफ़ बेहद करूं तो मुश्किल,न करू तो मुश्किल,
चलो अब मैं बेपरवाह हो जाती हूं।
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तुमको समझने की कोशिश करूं तो तकलीफ , नही करुं तो
तकलीफ,चलो अब मैं नासमझ बन जाती हूं।
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तुम्हारे बड़े नखरे उठाऊं तो मुश्किल, न उठाऊं तो मुश्किल,
चलो अब मैं भी थोड़ा नखराली हो जाती हूं।
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तुम्हारा बहुत ख़्याल रखूं तो तकलीफ, नही रखूं तो तकलीफ,
चलो अब मैं बेख़्याली हो जाती हूं ।
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तुमसे खूब बातें करूं तो परेशानी,न करूं तो परेशानी,
चलो अब मैं मौन हो जाती हूं।
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तुम्हें प्यार ज्यादा करूं तो दिक्कत, नही करूं तो दिक्कत,
चलो अब मैं बुत बन जाती हूं।
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कभी लगता जां देदूं तुम्हारे प्यार के लिए,
पर शायद ये भी कम लगे तुम्हें मेरे प्यार के लिए।
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राजेश्वरी ठाकुर
छत्तीसगढ़

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