हमारे बड़े भईया और दीदियाँ। 

घर की जिम्मेंदारी की दीवार। 
घर पर आने दे ना कोई आँच।
निभाने सबसे पहले खड़े होते।
हमारे बड़े भाईया और दीदियाँ।

घर में अपनी धौंस जमाते।
हमें अपने आगे पीछे घुमाते। 
हुक्म देकर काम कराते। 
हमारे बड़े भाईया और दीदियाँ। 

जब पड़े हमे डांट तो ।
सबसे पहले हमें सौहार्द दिखाते। 
गलती पर मम्मी पापा से बचाते ।
हमारे बड़े भईया और दीदियाँ।

छूपा हमारी नादानियाँ।
हमारे साथ साथ खुद भी डांट खाते। 
नजरें नीचे कर सब सुनते जातें। 
हमारे बड़े भईया और दीदियाँ।  

अपनी चीजें हम में बाँट देते।
रोए हम तो हमें पल में हँसा देते। 
ज्ञान का दर्पण हमें दिखाते।
हमारे बड़े भईया और दीदियाँ। 

जिंदगी की राहें सुझाते। 
पल में मुश्किल हल कर जाते।
पकड़े रहते हमेशा हमारा हाथ। 
हमारे बड़े भईया और दीदियाँ। 

दुःख की कोई परछाई। 
छुए ना हमें दुआ में अपनी मांगते हैं। 
अंधेरी राहों में दीये की रोशनी बन जाते।
हमारे बड़े भईया और दीदियाँ। 

अकेले कभी नही छोड़ते। 
जब जरूरत हो पल में। 
माँ पिता बन जाते।
हमारे बड़े भईया और दीदियाँ। 

घर की आन शान है।
बड़ो से ही माँ पिता की पहचान है। 
शुरू से ही बड़े बन जाते।
हमारे बड़े भईया और दीदियाँ। 

हमारे सिर की छत बनकर रहते।
ये साया हमेशा बना रहे भगवान। 
आप से भी हमारे लिए ये लड़ जाते ।
हमारे बड़े भईया और दीदियाँ। 

नीलम गुप्ता 🌹🌹(नजरिया )🌹🌹
               दिल्ली