भारतीय महिलाओं को प्रणाम कीजिए #8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की अगली कड़ी में आज हम बात करेंगे मैडम कामा की
भारत के आजादी की जंग में न जाने कितने शहीद हुए, बलिदान दिए गए उनमें से कुछ का नाम हमेशा अमर रहेगा ऐसे ही थी भारत की पहली स्वतंत्रता सेनानी मैडम कामा के नाम से जिन्हें हम जानते हैं।
श्रीमती भीखाजी रुस्तम कामा
भारतीय मूल की पारसी नागरिक की 24 सितंबर 18 51 को इनका जन्म हुआ था उन्होंने लंदन, जर्मनी, अमेरिका का भ्रमण कर भारत के स्वतंत्रता के पक्ष में माहौल बनाएं।
जर्मनी के स्टुटरगार्ड नगर में 22 अगस्त 1907 में सातवें अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस में भारत का प्रथम तिरंगा राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए यह सुविख्यात है और उस समय तिरंगा भी वैसा नहीं था जैसा आज है।
तिरंगा फहराते वक्त उ जबरदस्त भाषण देते हुए कहा था कि -"यही भारत का राष्ट्रीय ध्वज है इसे सलाम करो ,यही भारत का प्रतिनिधित्व करेगा"।
मैडम कामा का जन्म मुंबई में पारसी परिवार में हुआ और इनकी शादी एक व्यापारी रुस्तम जी से हुई 1885 मेंं।
उस समय इनके हम उम्र लड़कियों को इससे ज्यादा और कुछ नहीं चाहिए। इतने समृद्ध परिवार में इनका जन्म, इनकी शादी हुई किंतु उनके अंदर देशभक्ति भावना जागृत थी और रुस्तम जी इनके पति और इनके विचार हुकूमत को लेकर बिल्कुल अलग थे।
अपने ऐशो आराम के जीवन को छोड़कर में यह कूद पड़ी स्वतंत्रता संग्राम में।
अपने क्रांतिकारी लेखों से इन्होंने आजादी के लिए आवाज बुलंद की।
18 96 में जो महामारी फैली तो इन्होंने लोगों की बहुत सेवा की और यह खुद भी उसी बीमारी की चपेट में आ गई।
1902 में इलाज कराने के लिए लंदन गए और वहां से ही इन्होंने अपने यात्रा जो क्रांतिकारी यात्रा थी देश के लिए वह जारी रखीं। तबीयत ठीक ना होने के बावजूद यह वही क्रांतिकारी लोगों से मिलकर कार्य करती रही।
आजादी के लिए अंतरराष्ट्रीय माहौल बनाया भारत के आजादी के लिए उसमें चाहे होमरूल लीग की स्थापना हो, यूरोप ,अमेरिका में क्रांतिकारी लेख लिखना हो वहां सभी लोगों से जुड़ी रहे 30साल तक अपनी सेवाएं देती रहीऔर इसी तरह इन्होंने पहली बार जर्मनी में देश का झंडा भी फैला दिया।
13 अगस्त 1936 को मुंबई के हॉस्पिटल में उन्होंने आखिरी सांस ली और उनके मुंह से अंतिम शब्द 'वंदे मातरम' निकले थे।
बीकाजी कामा के नाम पर भारत में टिकट जारी की गई, जहाजों के नाम, बहुत सारे रास्तों के नाम इन के सम्मान में रखे गए हैं। इन पर इतनी सारी पुस्तकें लिखी गई हैं,
पहली भारतीय स्वतंत्रता सेनानी मैडम कामा हम सबके लिए प्रेरणादाई है
# अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं
वंदना शर्मा

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