जीवन भर भाई मेरे देना मेरा साथ
आज भी हैं कल भी रहेंगे हम साथ साथ।
बचपन में थामकर उँगली तूने मुझे चलना सिखाया,
कोई भी मुश्किल आई तो आज भी तू थाम लेता है मेरा हाथ।
वो बचपन के किस्से ,तेरे मेरे वो झगड़े ,
चन्द पल में ही कट्टी ,फिर दो पल में मेल मिलाप।
जब मुझे डोली में बैठाया भईया बस इतना कह पाया,बहन यह रस्म
जरूरी है, तुझे दूर भेजना मेरी मजबूरी है पर तु सदा रहेगी दिल के पास।
कभी कोई मुश्किल हो ,तुम न सहना, सारी बातें मुझसे कहना,
तूफानों मैं भी दौड़कर आएगा तेरा भईया रखना यह विश्वास।
भईया यह केबल राखी की डोर नही है ,मेरी प्रीत का कोई छोर नही है
तू तो मेरे लहू का कतरा, बहता मेरी सांस सांस।
सदा रहे तू दीर्घायु ,स्वस्थ और सदा मस्त,
तुझको मेरी उमर लगे कोई दर्द न पलक छुये बहना का है यह आशीर्वाद।
आज राखी के पावन पर्व पर कुछ स्वस्थ कारणों से जाना न हो पाएगा,
पहली बार हुआ, मेरा मन उदास ।
पर यह तो बस राहों की दूरी,
दिल से सांसो तक तो तू है मेरे साथ साथ।
अंजू दीक्षित

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