मैं कह रहा था ना ........ चिढ़े स्वर में पंकज ने कहा।
माँ ने पूछा--" क्यों क्या हो गया" ?.
अभी घर से थोड़ी दूर ही गया था कि बिल्ली ने रास्ता काट दिया।
मुझे उसी समय लगा गया कि आज तो काम होगा नहीं और सच में काम नहीं हुआ।
उसी समय पंकज का दोस्त सौरभ आ जाता है वह उसकी बातें सुनकर कहता है कि यह सब अंधविश्वास है । इन बातों पर ध्यान मत दिया करो।
जैसे रास्ते में कोई भी चलता है वैसे ही .....जानवर भी रास्ते में चलते हैं इसलिए इन बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए लेकिन पंकज के ऊपर उसकी बातों का कोई असर नहीं पड़ा।
कुछ दिन बाद--
आज पंकज और सौरभ दोनों का इंटरव्यू था । दोनों दोस्तों को साथ ही जाना था इंटरव्यू के लिए सौरव पंकज के घर आ गया । दोनों दोस्त माँ का आशीर्वाद लेकर घर से निकले।
आज फिर बिल्ली ने रास्ता काट दिया। पंकज वहीं पर रुक गया ।
पंकज बोला- यार बिल्ली ने रास्ता काट दिया इंटरव्यू में कुछ अच्छा नहीं हो पाएगा मैं सेलेक्ट नहीं हो पाऊंगा ।सौरव बोला--" अरे यार क्यों दकियानूसी बातें लेकर बैठे हो चलो !''"
लेकिन पंकज ने कहा-- नहीं अभी किसी को और को गुजर जाने दो रास्ते से तब मैं चलूंगा।
सौरव -- यार देर हो जाएगी हमें समय से पहुंचना भी तो है माँका आशीर्वाद तो है हमारे साथ। सब अच्छा होगा।
लेकिन पंकज ने उसकी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया। अतः सौरव बोला कि यार मैं जा रहा हूं।
यह कह कर वह चला गया ।
पंकज किसी के आने का इंतजार करता रहा।
काफी देर बाद एक सज्जन उधर से निकले और वह जब आगे बढ़े ,,पंकज उनके बाद गया ।
अब जल्दी पहुंचना था तो पंकज ने सोचा कि चलो मेट्रो में बैठ कर चलता हूं ,समय बचेगा ।
मेट्रो ट्रेन थोड़ी दूर चली गई थी कि एक जगह पर रुक गई और अनाउंसमेंट होने लगा कि कुछ तकनीकी खराबी के कारण विलंब होगा ।
""हमें यात्रियों की असुविधा के लिए खेद है।""
अब पंकज के दिल की धड़कन बढ़ने लगी कि अब वह क्या करें लेकिन उसके पास और कोई चारा भी नहीं था।
वह मेट्रो में से निकल भी नहीं सकता था ।
थोड़ी देर बाद जब मेट्रो ट्रेन चली तब पंकज की सांस में सांस आई ।
वह किसी तरह भागकर इंटरव्यू देने पहुंचा लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। इंटरव्यू खत्म हो गया था और सभी लोग वहां से जा चुके थे ।
अब पंकज के पास पछताने के सिवाय और कोई चारा नहीं था ।
शाम को सौरव पंकज के घर आया और बोला ---यार मैंने तुम्हारा बहुत देर तक इंतजार किया लेकिन तुम वहां पर दिखे ही नहीं। कब पहुंचे थे ?
पंकज में मायूसी भरे स्वर में कहा --मैं समय से नहीं पहुंच पाया । इस पर सौरव बोला -" तुम बिल्ली के रास्ता काटने का इंतजार ना करते तो कम से कम समय पर वहां पहुंच तो जाते।
सौरभ पंकज ने सौरभ से पूछा --" तुम्हारा इंटरव्यू कैसा रहा?
सौरभ ने कहा कि मैं सेलेक्ट हो गया और मुझे एक तारीख से ज्वाइन करना है ।
अब पंकज के अपने अंधविश्वास पर बहुत पछता रहा था।
शिक्षा---अंधविश्वास के कारण अपने किसी कार्य को अनदेखा न करें।
स्नेहलता पाण्डेय
नई दिल्ली

2 टिप्पणियाँ