जिस माँ ने अपने बेटे की खातिर रातो की नींदें न्योछावर की
सदा खुद गिले मे सोकर तुझे सुखे मे है सुलाया
अपने हाथो से तुझे निवाला है खिलाया
अपने स्पर्श का चुंँबन तेरे माथे पर जड़ा था
अपने ममता का आँचल मे तुझे पाला था
पहली बार तुझे चलना सिखाया था
सारे दुख झेलकर अपने हर कर्तव्य का पालन किया
वाह रे वाह बच्चे माँ का दूध का कर्ज ऐसे चुकाया
माँ बाप को वृद्धाआश्रम तू छोड़ आया
पिता ने तेरी सारी हसरतो को पूरा किया
उगँली पकड़कर तुझे स्कूल छोड़ कर आया
पिता ने दिन रात एककर अपनी परवाह न करके
तेरे सपनों को पूरा करने का हौसला दिया
बड़ा आदमी बनकर माँ बाप के त्याग को भूल गया
पुश्तैनी घर को बेचते वक्त तुझे अपना
बिताया हुआ बचपन याद न आया
क्या पैसों की माया है सबसे बड़ी माया
क्या तेरे जमीर ने तुझे नहीं धिक्कारा
क्या तेरे कदम नहीं लड़खड़ाए
जब तू अपने माँ बाप को वृद्धाआश्रम छोड़ कर आया
याद रखना वक्त किसी का उधार रखता नहीं
कल को तेरे बच्चे भी तुझे यही लौटाएंँगे
वाह रे वाह बहुत अच्छे से अपने माँ बाप का ऋण है चुकाया
जब तू अपने माँ बाप को वृद्धाआश्रम छोड़ कर आया
शिल्पा मोदी✍️

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