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सच में ज़िन्दगी कुछ और नहीं 
एक मैदान है जंग का 
हालातों के रंग का। 
खूबसूरत सा किस्सा है 
सुख और दुःख का हिस्सा है 
अनुभव बेहिसाब है! 
हालातों की क़िताब है। 
ग़म और खुशियों का दौर है 
समझ से परे जिंदगी कुछ और है!
तपती धुप सी कड़ी परेशानियाँ 
अल्हड़पन की ख़ूबसूरत सी 
नादानियाँ 
यूँ ही सिलसिला चलता रहता है राहों में 
कभी समेट लेती है ख़ुशियाँ अपनी बाहों में 
कभी निर्झरणी सी झरते हुए दो नैना 
मचलते हुए जज्बातों को बयाँ करती 
ये मूक बैना। 
समेट लेते हैं वो क़ायनात भी अपनी बाहों में। 
हालातों से निपटने का हुनर होता है 
जिनकी राहों में। 
 ज़िंदगी। 
बड़ी मशक्क़त से सजायी है ज़िन्दगी 
ग़म और ख़ुशियों से बनायी है ज़िन्दगी 
लोग नफ़रत की आग लगाने से बाज़ नहीं आते 
हमने बस मुहब्बत से सजाई है ज़िन्दगी। 
वो मिल गए सफ़र में फ़रिश्ता बन कर 
बस गए जो रूह में एक रिश्ता बन कर 
सच में ज़िन्दगी कुछ और नहीं। 
जीससे भी पूछा सबने एक ही बात बताई है 
और ये फ़लसफ़ा खुद ज़िन्दगी ने भी पढाई है। 


    @ मणि बेन द्विवेदी 
          वाराणसी